दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के तत्वावधानदिनांक 12 मार्च से 16 मार्च तक हर कथा का आयोजन।

 दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के तत्वावधान में सन शाइन स्कूल के बगल मे, चौबेपुर, वाराणसी में दिनांक 12 मार्च से 16 मार्च तक दोपहर 3 बजे से साम 6 बजे तक पांच दिवसीय हरि कथा का आयोजन किया गया है।

                           स्वामी श्री अर्जुनानंद जी
सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य स्वामी अर्जुनानंद जी ने कथा के तीसरे दिवस में  प्रसंग के माध्यम से भक्तों को सम्बोधित  करते हुवे बताया, मानव जीवन ईश्वर भक्ति के लिए मिला है। आज मनुष्य भक्ति को छोड़ कर भोग में मग्न है। यह जीवन बहुत कम समय के लिए हम सबको मिला है।इस मानव जीवन को साधन बनाकर इस संसार रूपी भवसागर से पार हुवा जा सकता है। आज का जन मानस मात्र धन या भौतिक पदाथों को एकत्रित करने में व्यस्त है , सत्य तो यह है कोई भी भौतिक पदार्थ यहां से हम साथ लेकर नही जा सकते है। यह भी सत्य है हम सबको यह शरीर छोड़ कर एक दिन जाना ही पड़ेगा। मृत्यु तो राजा रंक फकीर सब को एक न एक दिन आनि ही है। यदि एकत्रित करना ही है तो हम हरि भजन, सत्संग,सेवा व साधना का पुण्य एकत्रित करें।    

   स्वामी जी ने आगे बताया इसी मानव शरीर मे ब्रह्मज्ञान के द्वारा ईश्वर का प्रकाश स्वरूप का दर्शन किया जा सकता है।हम ईश्वर की भक्ति कर रहे है परंतु हमारी भक्ति शास्त्र के नियम अनुसार नही है । शास्त्र सम्मत ज्ञान के लिए एक पूर्ण गुरु की आवश्यकता होती है। पूर्ण गुरु केवल भगवान की चर्चा नही करते है, वह इसी मानव घट में ही दिव्य दृष्टि खोलकर परम प्रकाश रूप का दर्शन करवाते है। सर्व श्री आशुतोष महाराज जी भी शास्त्र अनुसार ब्रह्ज्ञान प्रदान के समय साधक का दिव्य दृष्टि खोलकर परम प्रकाश स्वरूप का दर्शन करवाते है। 

कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी श्री शिवसरणानंद जी ने मंत्र ध्वनि व प्रार्थना से किया, और अंतिम मंच संचालन स्वामी श्री हरिप्रकाशानंद जी ने किया। कार्यक्रम का समापन प्रभु की मंगल आरती से किया गया। 

कार्यक्रम के आयोजक शिवम चतुर्वेदी व संतोष जी ने आए भक्तों का धन्यवाद किया।

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