**धर्म का प्रारंभ अनुभव से होता है। जब ईश्वरीय सत्ता की झलक अपने में ही पा लेते हैं, तब हम धर्म के लक्षणों को धारण करते हैं।**
सर्व श्री आशुतोष महाराज जी का चिंतन(अनमोल वचन) प्रस्तुतिकरण श्री आर सी सिंह जी। धन और जल दोनो का ही स्वभाव एक समान है। जैसे …