सर्व श्री आशुतोष महाराज जी का चिंतन(अनमोल वचन) प्रस्तुतिकरण श्री आर सी सिंह जी।
एक नेक काम कीजिए, हम सभी धीरे-धीरे वृद्ध हो रहे हैं, इसलिए हम सबको सतर्क हो जाना चाहिए। कृपया एक मिनट निकालकर यह संदेश पढ़ें। यह आपके, आपके परिवार, पड़ोसियों और दोस्तों के लिए उपयोगी हो सकता है।
पुराने सहपाठियों की एक पुनर्मिलन सभा हुई थी। एक महिला उस दिन एक बारबेक्यू पार्टी में अचानक फिसल कर गिर गईं। दोस्तों ने उन्हें डॉक्टर को दिखाने को कहा, लेकिन उन्होंने कहा, “मैं ठीक हूँ।” उन्हें लगा कि शायद नई सैंडल की वजह से ईंट से टकराकर वे गिर पड़ी होंगी। सबने उन्हें संभाला, खाने की प्लेट दी और वे बाकी समय हँसती-बतियाती रहीं।
लेकिन बाद में उनके पति ने सभी को फोन कर बताया कि उन्हें अस्पताल ले जाया गया है और शाम 6 बजे उनका निधन हो गया — क्योंकि पार्टी के दौरान ही उन्हें स्ट्रोक (आघात) हुआ था।
अगर वहाँ मौजूद लोग स्ट्रोक के लक्षण पहचान पाते, तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी।
स्ट्रोक से पहले कुछ चेतावनी संकेत होते हैं और समय पर इलाज मिल जाए तो जान बचाई जा सकती है। एक न्यूरोसर्जन ने बताया कि यदि वे तीन घंटे के भीतर स्ट्रोक के मरीज तक पहुँच जाएँ, तो मरीज को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
*स्ट्रोक की पहचान कैसे करें? तीन सरल चरण याद रखें: S, T, और R*
*S - Smile (मुस्कुराना):* मरीज से कहें मुस्कुराने को। अगर चेहरा एक तरफ झुक जाए, तो समझिए खतरा है।
*T - Talk (बोलना):* मरीज से कहें एक सामान्य वाक्य बोलने को, जैसे “आज आसमान साफ़ है।” अगर वह ठीक से नहीं बोल पा रहा है, तो यह भी संकेत है।
*R - Raise (हाथ उठाना)*: कहें कि दोनों हाथ उठाए। अगर एक हाथ नीचे गिर रहा है या उठा नहीं पा रहा है, तो यह भी संकेत है।
एक और संकेत- मरीज से कहें जीभ बाहर निकाले। अगर जीभ एक ओर मुड़ जाए, तो यह भी स्ट्रोक का लक्षण हो सकता है।
इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे तो बिना देर किए फौरन एम्बुलेंस या नज़दीकी अस्पताल में संपर्क करें और सभी लक्षण विस्तार से बताएं।
एक हृदय रोग विशेषज्ञ ने ज़ोर देकर कहा:
यदि यह संदेश पढ़ने वाला हर व्यक्ति इसे कम-से-कम दस लोगों को भेजे, तो कम-से-कम एक जीवन बच सकता है।
मैंने अपना कर्तव्य निभाया।
अब आपकी बारी है!
इसे आगे फैलाएं।
“जब आप किसी और को गुलाब देते हैं, तो उसकी खुशबू आपके हाथों में भी रह जाती है!”
“इस संदेश को फैलाएं, पुण्य की सुगंध आपके दिल में बस जाएगी!”
चिकित्सक कहते हैं:
चाहे कितने भी व्यस्त क्यों न हों,
पुण्य के कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। स्वास्थ्य सेवा, मानव सेवा। जिंदगी खुल कर जियो और अपनो के साथ जियो।
**ओम् श्री आशुतोषाय नम:**
"श्री रमेश जी"
