दिव्य ज्योति जागृती संस्थान तारामंडल गोरखपुर आश्रम में मासिक आध्यात्मिक कार्यक्रम का भव्य आयोजन संपन्न।

         संगत को संबोधित करते हुए स्वामी अर्जुनानंद जी

होली पर्व की आध्यात्मिक प्रेरणाओं का प्रवाह में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा   तारामंडल स्थित गोरखपुर आश्रम में दिनांक 7 मार्च को मासिक आध्यात्मिक सत्संग कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सत्संग विचार देते हुए दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य स्वामी अर्जुनानंद ने  होली के पावन पर्व के गहन आध्यात्मिक स्वरूप को दर्शाया।

 कार्यक्रम का उद्देश्य श्रद्धालुओं को भक्ति और सत्य के रंगों से परिपूर्ण जीवन जीने के लिए प्रेरित करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ वेदमंत्रों तथा भक्तिपूर्ण भजनों के साथ हुआ, जिसने एक शांत वातावरण निर्मित किया। स्वामी जी ने बताया कि होली के रंग दिव्य प्रेम, एकता और आत्मिक जागृति का प्रतीक हैं। सच्चा उत्सव केवल बाह्य उल्लास में नहीं, बल्कि मुख्यतः आंतरिक जागृति में निहित है।  अपने भीतर निरंतर दिव्य सत्ता का चिंतन व स्मरण बनाए रखें।

सत्संग बिचारों में होलिका दहन के गहरे अर्थ पर प्रकाश डाला गया, जिसमें क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या और अज्ञान जैसे आंतरिक दोषों को स्वाहा करने का संदेश दिया गया। सत्संग में बताया गया कि वास्तविक होली तब मनाई जाती है जब हृदय भक्ति, विनम्रता और समर्पण के रंगों से रंग जाता है। 

प्रह्लाद की अडिग श्रद्धा और विश्वास को दर्शाया , जिसे गुरु नारद के मार्गदर्शन ने पोषित किया।  अहंकार विनाश का कारण बनता है, जबकि विनम्रता से दिव्य संरक्षण मिलता है। होली प्रेम का उत्सव है और सद्गुरु के संरक्षण में ऐसा महान उत्सव जब शिष्य मानता है उसके भीतर भक्ति भाव एवं आध्यात्मिक उन्नति स्वतः ही हो जाती है। इसलिए एक सच्चा शिष्य गुरु के संरक्षण में पवित्र ज्ञान को प्राप्त कर मुक्ति एवं मोक्ष की प्राप्ति करता है यही जीवन का लक्ष्य है। कार्यक्रम का समापन मंगल आरती के माध्यम से किया गया।

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