**ईश्वर का साक्षात्कार स्वयं के भीतर करना ही परम ज्ञान है।**

 सर्व श्री आशुतोष महाराज जी का चिंतन(अनमोल वचन) प्रस्तुतिकरण श्री आर सी सिंह जी।

आज हम बच्चों के दिमाग में किताबी ज्ञान का बोझ भरते जा रहे हैं। इस बोझ के कारण वे उठ नहीं पा रहे, बल्कि धँसते जा रहे हैं। क्योंकि यह किताबी ज्ञान न तो उन्हें मानवीय मूल्यों और आदर्शों का महत्व सिखाता है, न ही स्वाध्याय और अध्यात्म की ओर प्रेरित करता है। रामकृष्ण परमहंस जी अक्सर कहते थे- "बहुत ज्यादा किताबी ज्ञान भी नुकसान पहुँचाता है। जरूरत है आत्मज्ञान के बारे में जानने की।" यह ब्रह्मज्ञान वही है जिसे प्राप्त कर साधारण सा नरेन्द्र विश्ववंदनीय विवेकानंद बन गया था।

   यह परम ज्ञान है- ईश्वर का साक्षात्कार स्वयं के भीतर करना। इसे परम आचार्य यानी पूर्ण सद्गुरु ही प्रदान कर सकते हैं। हम सब इस परम ज्ञान को पाने हेतु अग्रसर हों, इससे पूर्व कि किताबों से प्राप्त अहंकारी व विवेकहीन बुद्धि हमें ले डूबे।

    मानव जीवन एक अवसर है अपने लक्ष्य को प्राप्त करने का। और हमारा लक्ष्य है ईश्वर को जानना और जानकर उसे पाने के रास्ते पर चलना। अगर हम ऐसा करते हैं तो ठीक है, नहीं तो फिर से 84 लाख के निम्न से निम्न योनियों में जाने के लिए मजबूर होते हैं। 

    अतः किसी ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरु से ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर निरंतर ध्यान साधना, सेवा व सत्संग करते रहना चाहिए, जिससे मानव जीवन सार्थक हो जाए।

**ओम् श्री आशुतोषाय नम:**

"श्री रमेश जी"

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