सर्व श्री आशुतोष महाराज जी का चिंतन(अनमोल वचन) प्रस्तुतिकरण श्री आर सी सिंह जी।


*महायोगी का महा रहस्य तब तक समझ में नहीं आता, जब तक सद्गुरु रहस्यों के अवगुंठन न हटा दे।*


          श्री आर सी सिंह जी रिटायर्ड एयरफोर्स ऑफिसर
 
परमात्मा का विराट ऊर्जा जब किसी देहधारी में उतरकर उसे परमात्म रूप कर देती है, तो उसको देख पाने की क्षमता सभी के पास नहीं होती। उसकी अलौकिक सुगंध को अनुभव करने की योग्यता तो विरले ही पाते हैं। वे अति सौभाग्यशाली होते हैं, जिनपर कृपा करके परमात्मा स्वयं कहे कि - "देख मैं वही हूँ। मुझमें डूब।" और उनसे बड़ा अभागा और मूढमति कोई नहीं, जो परमात्मा द्वारा अपना परिचय दिए जाने के बाद भी संदेहग्रस्त रहता है।
    इसी कारण वे योगी, जो दिव्य दर्शन करते हैं, प्रायः किसी को उसका भेद कहते नहीं। वे जानते हैं कि उनके वर्णन से संसार उतना आनंदित नहीं होगा, जितना संशयग्रस्त और द्वंद्ग्रस्त हो जाएगा। यही बात है कि किसी का अनुभव दूसरे का अनुभव तबतक नहीं बन सकता, जबतक कि वह स्वयं उसका अनुभव न कर ले। इसलिए बुद्धि से अधिक भाव जगत में रहना चाहिए। भाव ही यात्रा कराता है। इस मार्ग का बुद्धि को कुछ नहीं पता।
    सामान्यतः संसार संदेहों और तुच्छ गणनाओं पर टिका है। उनके बिसारने से हमें अपने हीरे जैसे अनुभव को कंकड़ समझकर नहीं बिसराना चाहिए। महायोगी का महा रहस्य तबतक समझ में नहीं आता, जबतक सद्गुरु रहस्यों के अवगुंठन न हटा दे। इसलिए मैं तो यही कहता हूं - -
"हे गुरुदेव आशुतोष महाराज तूं ही एक सुजान।
तेरी शरण पड़ा हूँ प्रभु रखियो मेरी लाज।।"
*ओम् श्री आशुतोषाय नम*
RC Singh.7897659218.

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