*किया गया प्रत्येक कर्म मनुष्य के मन पर भी छाप छोड़ता है।*

 सर्व श्री आशुतोष महाराज जी का चिंतन(अनमोल वचन) प्रस्तुतिकरण श्री आर सी सिंह जी।

                               श्री आर सी सिंह जी 

मनुष्य योनि में किया गया प्रत्येक कर्म या क्रिया मनुष्य के मन पर भी कुछ न कुछ छाप अवश्य ही छोड़ता है। फिर एक ही प्रकार का कर्म बार बार होने से छाप और अधिक गहरी होती जाती है, जो एक स्वभाव को जन्म देती है। मनुष्य योनि में ही हमारा स्वभाव + - होता है। फिर स्वभाव बनने पर 90% कर्म सहज ही होने लगते हैं, अर्थात कर्म करने नहीं पड़ते।

      नींद में देखे गए सभी सपने सदा ही सच लगते हैं। लेकिन नींद से जागते ही सपने झूठे लगते हैं। जबकि मिला हुआ जीवन हम सबको जागृत अवस्था में सच ही लगता है। लेकिन गहरे चिंतन के बाद आप महसूस करेंगे कि मृत्यु रूपी नींद में जाने पर बीता हुआ जीवन भी एक सपना ही लगेगा। 

     परमात्मा को तत्व रूप से जान लेने पर परमात्मा से प्रेम किए बिना रहना असंभव है। यदि हमें परमात्मा की याद ही नहीं आती, तो हमें समझ लेना चाहिए कि अभी तक हमने परमात्मा को सही सही जाना ही नहीं। परमात्मा को जानने का आरंभिक सरल उपाय ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर केवल निरंतर ध्यान साधना व सत्संग करते रहना ही है। जिसे अक्सर मनुष्य गंभीरता से नहीं लेता है। 

*ओम् श्री आशुतोषाय नम:*

'श्री रमेश जी'

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