*अनूठा वशीकरण मंत्र*

सर्व श्री आशुतोष महाराज जी का चिंतन(अनमोल वचन) प्रस्तुतिकरण श्री आर सी सिंह जी।

                                 श्री आर सी सिंह जी 

आध्यात्मिक विभूति पंडित मिहीलाल जी की वाणी इतनी मधुर और प्रभावी थी कि जो भी उनके सत्संग में आता वह उनकी प्रेरणा से समाज सेवा करने लगता। वह हर बात को बहुत प्यार से समझाते थे।  वह अक्सर कहा करते थे कि जो कड़वा सुन कर भी मीठा बोलता है वही सच्चा संत है।  जो निंदा और आलोचना सुनकर क्रोधित नहीं होता वही सफल गृहस्थ  है।   एक बार की बात है वह टूंडला प्रवास पर थे।  वहां पर एक व्यक्ति उनसे सत्संग सुनने के लिए आया। उसने किसी से सुन रखा था कि पंडित जी वशीकरण मंत्र जानते हैं। उस व्यक्ति का अपने पड़ोसियों के साथ विवाद चल रहा था।  उसने सोचा कि यदि पंडित जी वशीकरण मंत्र की दीक्षा दे देंगे तो वह अपने उन पड़ोसियों को भी जीत लेगा।  उस श्रद्धालु ने पंडित जी से पूछा, महाराज जी क्या आप वशीकरण मंत्र जानते हैं और उसकी जाप -विधि मुझे बता सकते हैं?

पंडित जी ने कहा हां, तो वह बहुत खुश हो गया।  उस श्रद्धालु ने उनसे कहा कृपया वह विधि मुझे बता दीजिए।  तो पंडित जी बोले कि भैया मैं तो सबसे मीठा बोलता हूं।  किसी की बात व्यर्थ में नहीं काटता। धैर्य से सब की सुनता हूं।  हृदय से सब का भला चाहता हूं। यही वशीकरण मंत्र है।  तुम यदि इसका पालन करोगे तो यह तुरंत प्रभावी चमत्कार दिखाएगा। जिज्ञासु का समाधान हो गया।  सच में हमारे पूर्ण संतों और महापुरुषों के पास ज्ञान की ऐसी विधि है जिस पर पूर्ण धैर्य और विश्वास के साथ चला जाए तो मनुष्य के स्वभाव में परिवर्तन आता ही है। साधना, सेवा और सिमरन में ऐसी अटूट शक्ति है कि जो भी उसे अपनाता है उसके स्वभाव में परिवर्तन आना लाजमी है।  परंतु शर्त यह है कि हम सत्संग खाली सुने ही नहीं अपितु उसे मन से धारण भी करें।

अंतर घट में गुरु कृपा से जब, ब्रह्मदीप जगमगाता है।

कूटस्थ हुआ साधक तब, हर क्षण दीपोत्सव मनाता है।

*ओम् श्री आशुतोषाय नम:*

"श्री रमेश जी"

Post a Comment

Previous Post Next Post