ख्वाहिशें कम नहीं होती/ इच्छाएं खत्म नहीं होती/ क्या करें /क्या ना करें/सच ये बहुत जिद्दी है/ इच्छाओं से मिलकर /चक्रव्यूह रचती हैं/ आसानी से कहां थमती हैं।

 

भागीरथी सांस्कृतिक मंच, गोरखपुर  की 764 वी काव्य गोष्ठी गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर सर्वांग हॉस्पिटल के सभागार में संपन्न हुई।

कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन अतिथियों के द्वारा मां सरस्वती को पुष्प अर्पण के द्वारा संपन्न हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि सौदागर सिंह जी ने व संचालन संस्था सचिव बृजेश राय जी ने किया।डा.प्रतिभा गुप्ता जी के जन्म दिवस पर उनको बुके व अंगवस्त्र देकर संस्था के सभी लोगों ने शुभकामनाएं दीं।इस अवसर पर कवयित्री डा.प्रतिभा गुप्ता ने ख्वाहिशों की बात की -

ख्वाहिशें कम नहीं होती/ इच्छाएं खत्म नहीं होती/ क्या करें /क्या ना करें/सच ये बहुत जिद्दी है/ इच्छाओं से मिलकर /चक्रव्यूह रचती हैं/ आसानी से कहां थमती हैं।

कवि कुन्दन वर्मा पूरब  ने हिंदुस्तान को यूं परिभाषित किया  -

मजहब नहीं यहां ईमान पढ़ा जाता है,

गीता ग्रन्थ कुरान से इंसान गढ़ा जाता है।

जाति धर्म से पहले जहां राष्ट्र पूजते हैं ,

ऐसे वतन को हिंदुस्तान कहा जाता है।

व्यक्ति की आंखों से उसके जज़्बात को पढ़ने की कुछ यूं कोशिश की वरिष्ठ शायर अरुण ब्रह्मचारी जी ने -

उसकी आंखों में समंदर की सी गहराई है।

 दीद-ए-चश्म में इक खास सी रानाई है।।

अध्यक्षता कर रहे हैं वरिष्ठ कवि सौदागर सिंह जी ने देश को यूं परिभाषित किया -

देश हिंदुस्तां है हमारा हम हैं वासी यहां के निराले,

 देश भक्ति भरी है रगों में, चाहे गोरे हैं या है काले।

अन्य जिन कवियों ने काव्य पाठ किया उनके नाम है, सर्वश्री चंद्रगुप्त प्रसाद वर्मा अकिंचन, कौशल किशोर मणि, बागेश्वरी प्रसाद मिश्र वागीश, राम समुझ संवारा, बृजेश राय, सत्यनारायण पथिक, प्रेमनाथ मिश्र शशि बिंदु नारायण मिश्र, राम सुथार सिंह सैथवार आदि।

श्रोताओं में उपस्थित रहे सर्वश्री संजय प्रकाश सिंह, युसूफ जमाल, डा. राशिद हुसैन, डा.एस.एन. सिंह ,

 अजय श्रीवास्तव जी व अस्पताल के अन्य स्टॉफ।सभी के प्रति आभार व्यक्त किया संयुक्त सचिव कुन्दन वर्मा पूरब जी ने।

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