सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा वर्षा
हमारे जीवन में ऐसी बहुत सी परिस्थितियों आती है, जब हम कोई नकारात्मक कर्म कर जाते हैं। जैसे - क्रोध में आकर किसी पर वार कर देना, उससे लड़ाई कर लेना। शराब और ड्रग्स का सेवन करना। किसी की वस्तु चुरा लेना। टीवी या मोबाइल पर अश्लील वीडियो देखना।
इस सभी कार्यों को पहली बार करने में हिचकिचाहट होती है। परंतु जब हम कई बार ऐसे कार्य कर लेते हैं, तो अगली बार वही गलत कार्य करने में हमें कोई ज्यादा हिचक नहीं होती।
परंतु कई बार समाज और कानून के चलते हममें से कई लोग स्वयं को इन गलत कार्यों को करने से रोक भी लेते हैं। उदाहरण के लिए-यदि कोई चोरी करने के लिए आगे बढ़े, तो कानून के डर की वजह से वह उसे नहीं करता। ऐसे बहुत सारे सामाजिक, कानूनी और पारिवारिक नियमों के कारण हम इन नकारात्मक कार्यों को असल जिंदगी में नहीं कर पाते। लेकिन क्या हम मानसिक स्तर पर इन कार्यों को करने से खुद को रोक पाते हैं? पर मानसिक अभ्यास या ब्रेन रीवायरिंग की वजह से हमारा यह कर्म बाहर आ ही जाता है।
अतः: बाहर से कंट्रोल करने के साथ-साथ अति आवश्यक है कि हम स्वयं को मानसिक स्तर पर भी कंट्रोल करें। परंतु भीतर में उठ रहे नकारात्मक विचार को हम कैसे रोक सकते हैं? इसके लिए हमारे पास कौन सा उपाय है? सभी संतो ने एकमत होकर कहा -वह बल है , आत्मबल । सद्गुरु द्वारा प्रदत ब्रह्मज्ञान से ही यह आत्म बल जागृत होता है।
ॐ श्री आशुतोषाय नमः
श्री सियाबिहारी
