“संस्कृति-बोध से ही राष्ट्र की क्षमताओं का सही उपयोग संभव" : प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा।
"निस्वार्थ कर्म से ही समाज और राष्ट्र की प्रगति संभव है": डॉ. मनीष कुमार त्रिपाठी
छात्र शक्ति राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत है": डॉ. शिवकुमार बर्नवाल
राष्ट्रीय सम्मेलन।
26 जनवरी 2026, गोरखपुर। गणतन्त्र दिवस का यह पावन दिवस हम सभी के लिए गौरव, स्वाभिमान और राष्ट्रनिष्ठा का प्रतीक है। आज ही के दिन भारत ने अपने संविधान को आत्मसात कर स्वयं को एक सम्प्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में प्रतिष्ठित किया। 77 वर्षों की यह यात्रा केवल समय की गणना नहीं है, बल्कि यह उन असंख्य बलिदानों, संघर्षों और सपनों की गाथा है, जिनके बल पर आज हम स्वतंत्र भारत की खुली हवा में साँस ले रहे हैं।
उक्त बाते महाराणा प्रताप महाविद्यालय जंगल धूसड़, गोरखपुर में भारत गणराज्य के 77 वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर छात्रसंघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम मे बतौर मुख्य अतिथि दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर के रक्षा एवं स्त्रातजिक अध्ययन विभाग के आचार्य एवं पूर्व अध्यक्ष प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा ने कही। प्रो. सिन्हा ने आगे कहा कि यदि हमें भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है तो हमें अपने भारत की सांस्कृतिक विशेषताओं, क्षमताओं और भारतीय ज्ञान परंपरा को समझना होगा। उन्होंने बताया कि कोविड के दौरान भारत में ही पूरी दुनिया का मार्गदर्शन किया था, इसके अलावा पूरी दुनिया को मोटे अनाज के बारे में बताने वाला देश भी भारत ही है। प्रो. सिन्हा ने युवाओं से माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के पंच प्रण के संकल्प को आत्मसात करने का आह्वान किया और कहा कि देश का भविष्य विद्यार्थियों के हाथों में है और उन्हें केवल अधिकारों के प्रति ही नहीं, बल्कि अपने संवैधानिक कर्तव्यों के प्रति भी सजग रहना चाहिए। उन्होंने आगे यह भी कहा कि आज, जब हम अपने गणतंत्र दिवस का जश्न मना रहे हैं तो हमें अपनी अपनी जिम्मेदारियां को समझना होगा और यह संकल्प लेना होगा कि हम अपने देश को और भी बेहतर, विकसित और सशक्त बनाएंगे और प्रत्येक भारतीय का जीवन खुशहाल और समृद्ध बनाएंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ मनीष कुमार त्रिपाठी ने कहा कि महाराणा प्रताप जैसे वीर पुरुष के नाम से स्थापित यह महाविद्यालय हमें निरंतर स्वाभिमान, त्याग और राष्ट्रनिष्ठा की प्रेरणा देता है। भारतीय संस्कृति का मूल मंत्र है—“कर्मण्येवाधिकारस्ते”। हमारा अधिकार कर्म करने में है, और वही कर्म जब सेवा की भावना से जुड़ जाता है, तो वह व्यक्ति को नहीं, पूरे समाज और राष्ट्र को ऊँचाइयों पर ले जाता है। डॉ. त्रिपाठी ने आगे बताया कि सेवा कोई पद नहीं, कोई प्रदर्शन नहीं सेवा एक संस्कार है। वह संस्कार जो हमें अपने लिए नहीं, दूसरों के लिए जीना सिखाता है। जब हम बिना अपेक्षा के कर्म करते हैं, तभी सच्चे अर्थों में मानवता और राष्ट्रधर्म का निर्वाह होता है। उन्होंने आगे कहा कि हमारे महापुरुषों ने हमें सिखाया है कि 'सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं और कर्म से बड़ा कोई साधन नहीं।' महाराणा प्रताप, महात्मा गांधी और स्वामी विवेकानंद का जीवन कर्म और सेवा का जीवंत उदाहरण है। अन्त में उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि हम भाषण नहीं, आचरण से देश को मजबूत करें। छोटा-सा कर्म भी यदि निष्ठा और सेवा भाव से किया जाए, तो वह बड़ा परिवर्तन ला सकता है। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आप केवल ज्ञान के साधक नहीं हैं, बल्कि आप ही आने वाले भारत के शिल्पकार हैं। भारतीय संविधान ने आपको अधिकार दिए हैं, परंतु उसके साथ कर्तव्यों का निर्वहन भी उतना ही आवश्यक है। जब युवा अपने कर्तव्यों को समझ लेता है, तभी राष्ट्र सशक्त बनता है।
कार्यक्रम में छात्रसंघ प्रभारी डॉo शिवकुमार बर्नवाल ने कहा कि छात्र जीवन केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित नहीं है। यह वह समय है, जब नेतृत्व, अनुशासन, सेवा और राष्ट्रभक्ति जैसे गुण विकसित होते हैं। छात्र संघ का उद्देश्य भी यही है कि विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक चेतना, जिम्मेदारी और सामाजिक सहभागिता का विकास हो। उन्होंने आगे कहा कि महाराणा प्रताप जैसे महान राष्ट्रनायक के नाम से जुड़े इस महाविद्यालय में अध्ययन करना हम सभी के लिए गौरव की बात है। उनके जीवन से हमें यह शिक्षा मिलती है कि परिस्थितियाँ कैसी भी हों, स्वाभिमान और राष्ट्रधर्म से समझौता नहीं किया जा सकता।
इससे पूर्व प्रातः 09:30 बजे महाविद्यालय के प्राचार्य डॉo मनीष कुमार त्रिपाठी द्वारा ध्वजारोहण किया गया। तत्पश्चात महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा देशभक्ति की भावना से ओत -प्रोत भाषण, कविता पाठ, समूह गीत, एकल गीत, एकल नृत्य एवं समूह नृत्य आदि विभिन्न प्रकार की सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति की गई। कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय के विद्यार्थी श्री आयुष कुमार कुशवाहा एवं सुश्री सत्या गुप्ता द्वारा किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त शिक्षक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
इसी क्रम में छात्रसंघ की साधारण सभा का आयोजन सौहार्दपूर्ण एवं अनुशासित वातावरण में सम्पन्न हुआ। यह सभा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनीष कुमार त्रिपाठी की अध्यक्षता में आयोजित हुई जिसका उद्देश्य छात्रसंघ की गतिविधियों की समीक्षा करना, भावी कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करना तथा विद्यार्थियों की समस्याओं एवं सुझावों पर विचार-विमर्श करना रहा। इस अवसर पर विभिन्न छात्र प्रतिनिधियों ने छात्रहित से जुड़े मुद्दों को सभा के समक्ष रखा तथा शैक्षणिक वातावरण को और अधिक सुदृढ़ बनाने हेतु सुझाव प्रस्तुत किए।
इसी क्रम में योगीराज बाबा गंभीर नाथ सेवा आश्रम जंगल धूसड़, गोरखपुर में प्रातः 9:15 बजे छात्रावास प्रभारी श्री विनय कुमार सिंह के द्वारा मंदिर परिसर मे ध्वजारोहण किया गया। इस अवसर पर छात्रवासियों के साथ मंझरिया, हसनगंज ,जंगल धूसड़, ककरहिया, रेवतहिया आदि गांवों के गणमान्य व्यक्ति भी सम्मिलित हुए।
उक्त बाते महाराणा प्रताप महाविद्यालय जंगल धूसड़, गोरखपुर में भारत गणराज्य के 77 वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर छात्रसंघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम मे बतौर मुख्य अतिथि दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर के रक्षा एवं स्त्रातजिक अध्ययन विभाग के आचार्य एवं पूर्व अध्यक्ष प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा ने कही। प्रो. सिन्हा ने आगे कहा कि यदि हमें भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है तो हमें अपने भारत की सांस्कृतिक विशेषताओं, क्षमताओं और भारतीय ज्ञान परंपरा को समझना होगा। उन्होंने बताया कि कोविड के दौरान भारत में ही पूरी दुनिया का मार्गदर्शन किया था, इसके अलावा पूरी दुनिया को मोटे अनाज के बारे में बताने वाला देश भी भारत ही है। प्रो. सिन्हा ने युवाओं से माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के पंच प्रण के संकल्प को आत्मसात करने का आह्वान किया और कहा कि देश का भविष्य विद्यार्थियों के हाथों में है और उन्हें केवल अधिकारों के प्रति ही नहीं, बल्कि अपने संवैधानिक कर्तव्यों के प्रति भी सजग रहना चाहिए। उन्होंने आगे यह भी कहा कि आज, जब हम अपने गणतंत्र दिवस का जश्न मना रहे हैं तो हमें अपनी अपनी जिम्मेदारियां को समझना होगा और यह संकल्प लेना होगा कि हम अपने देश को और भी बेहतर, विकसित और सशक्त बनाएंगे और प्रत्येक भारतीय का जीवन खुशहाल और समृद्ध बनाएंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ मनीष कुमार त्रिपाठी ने कहा कि महाराणा प्रताप जैसे वीर पुरुष के नाम से स्थापित यह महाविद्यालय हमें निरंतर स्वाभिमान, त्याग और राष्ट्रनिष्ठा की प्रेरणा देता है। भारतीय संस्कृति का मूल मंत्र है—“कर्मण्येवाधिकारस्ते”। हमारा अधिकार कर्म करने में है, और वही कर्म जब सेवा की भावना से जुड़ जाता है, तो वह व्यक्ति को नहीं, पूरे समाज और राष्ट्र को ऊँचाइयों पर ले जाता है। डॉ. त्रिपाठी ने आगे बताया कि सेवा कोई पद नहीं, कोई प्रदर्शन नहीं सेवा एक संस्कार है। वह संस्कार जो हमें अपने लिए नहीं, दूसरों के लिए जीना सिखाता है। जब हम बिना अपेक्षा के कर्म करते हैं, तभी सच्चे अर्थों में मानवता और राष्ट्रधर्म का निर्वाह होता है। उन्होंने आगे कहा कि हमारे महापुरुषों ने हमें सिखाया है कि 'सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं और कर्म से बड़ा कोई साधन नहीं।' महाराणा प्रताप, महात्मा गांधी और स्वामी विवेकानंद का जीवन कर्म और सेवा का जीवंत उदाहरण है। अन्त में उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि हम भाषण नहीं, आचरण से देश को मजबूत करें। छोटा-सा कर्म भी यदि निष्ठा और सेवा भाव से किया जाए, तो वह बड़ा परिवर्तन ला सकता है। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आप केवल ज्ञान के साधक नहीं हैं, बल्कि आप ही आने वाले भारत के शिल्पकार हैं। भारतीय संविधान ने आपको अधिकार दिए हैं, परंतु उसके साथ कर्तव्यों का निर्वहन भी उतना ही आवश्यक है। जब युवा अपने कर्तव्यों को समझ लेता है, तभी राष्ट्र सशक्त बनता है।
कार्यक्रम में छात्रसंघ प्रभारी डॉo शिवकुमार बर्नवाल ने कहा कि छात्र जीवन केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित नहीं है। यह वह समय है, जब नेतृत्व, अनुशासन, सेवा और राष्ट्रभक्ति जैसे गुण विकसित होते हैं। छात्र संघ का उद्देश्य भी यही है कि विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक चेतना, जिम्मेदारी और सामाजिक सहभागिता का विकास हो। उन्होंने आगे कहा कि महाराणा प्रताप जैसे महान राष्ट्रनायक के नाम से जुड़े इस महाविद्यालय में अध्ययन करना हम सभी के लिए गौरव की बात है। उनके जीवन से हमें यह शिक्षा मिलती है कि परिस्थितियाँ कैसी भी हों, स्वाभिमान और राष्ट्रधर्म से समझौता नहीं किया जा सकता।
इससे पूर्व प्रातः 09:30 बजे महाविद्यालय के प्राचार्य डॉo मनीष कुमार त्रिपाठी द्वारा ध्वजारोहण किया गया। तत्पश्चात महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा देशभक्ति की भावना से ओत -प्रोत भाषण, कविता पाठ, समूह गीत, एकल गीत, एकल नृत्य एवं समूह नृत्य आदि विभिन्न प्रकार की सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति की गई। कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय के विद्यार्थी श्री आयुष कुमार कुशवाहा एवं सुश्री सत्या गुप्ता द्वारा किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त शिक्षक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
इसी क्रम में छात्रसंघ की साधारण सभा का आयोजन सौहार्दपूर्ण एवं अनुशासित वातावरण में सम्पन्न हुआ। यह सभा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनीष कुमार त्रिपाठी की अध्यक्षता में आयोजित हुई जिसका उद्देश्य छात्रसंघ की गतिविधियों की समीक्षा करना, भावी कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करना तथा विद्यार्थियों की समस्याओं एवं सुझावों पर विचार-विमर्श करना रहा। इस अवसर पर विभिन्न छात्र प्रतिनिधियों ने छात्रहित से जुड़े मुद्दों को सभा के समक्ष रखा तथा शैक्षणिक वातावरण को और अधिक सुदृढ़ बनाने हेतु सुझाव प्रस्तुत किए।
इसी क्रम में योगीराज बाबा गंभीर नाथ सेवा आश्रम जंगल धूसड़, गोरखपुर में प्रातः 9:15 बजे छात्रावास प्रभारी श्री विनय कुमार सिंह के द्वारा मंदिर परिसर मे ध्वजारोहण किया गया। इस अवसर पर छात्रवासियों के साथ मंझरिया, हसनगंज ,जंगल धूसड़, ककरहिया, रेवतहिया आदि गांवों के गणमान्य व्यक्ति भी सम्मिलित हुए।
