संत रविदास जी की जयंती के शुभअवसर पर आयोजित भागीरथी सांस्कृतिक मंच, गोरखपुर की 807वी काव्य गोष्ठी बेतियाहाता स्थित सर्वांग हास्पिटल के सभागार में सम्पन्न हुई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो.अनिल कुमार राय(पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष,दी.द.उपा.गो.वि.वि.
गोरखपुर ) विशिष्ट अतिथि श्री अरविन्द शर्मा (संरक्षक,भागीरथी सांस्कृतिक मंच, गोरखपुर) रहें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर श्री महमूद भाई ने की। पूरे कार्यक्रम का सफलतापूर्वक संचालन किया संस्था सचिव भाई कुन्दन वर्मा 'पूरब' ने।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अतिथियों द्वारा किया गया। मां सरस्वती की आराधना प्रस्तुत की - वरिष्ठ गीतकार डॉ. सुधीर श्रीवास्तव 'नीरज' ने।
तत्पश्चात युवा कवयित्री श्रीमती बिंदू चौहान ने आज के दौर में इश्क करने वालों को सचेत किया इस मुक्तक से -
वक्त की ऐ गुजारिश है सुन लो,
इश्क से कुछ भी हासिल नहीं है।
आग का एक दरिया है इसमें ,
संग तेरे कोई शामिल नहीं है ।
वरिष्ठ कवयित्री डा.प्रतिभा गुप्ता ने नीद की बात की -
नीद तुम मेरे करीब आओ/ मेरी पलकों में समाकर /अपनी जिम्मेदारी निभाओं/ चांद और झिलमिलाते सितारों की/ स्वप्निल दुनिया में /मुझे ले जाओ!
वरिष्ठ गीतकार अवधेश शर्मा 'नन्द' जी ने भोजपुरी दोहे में (शब्द)को परिभाषित किया -
सबद उबारे जाल से, सबद फॅंसावे जाल ,
'नन्द' सबद उपरे गलत, बने जीव जंजाल।
विशिष्ट अतिथि श्री अरविन्द शर्मा जी ने कवियों को निर्भीकता से अपनी बात रखने के लिए उत्साहित किया इन शब्दों में -
खुले मंच से बोलिए खूब ठोकिए ताल,
अब चिंता किस बात की ना बांका होगा बाल।
मुख्य अतिथि प्रो.अनिल कुमार राय जी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा - साहित्य ही वह जगह है जहां लोगों का विश्वास बना हुआ है। भाषा की दुनिया में काम करने वाले कवियों,लेखकों, पत्रकारों से बहुत उम्मीद है, जनता की। वे जनता के विश्वास की रक्षा करें।
अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ शायर महमूद भाई ने ग़ज़ल के ये शेर इस तरह है -
शोलों से घिरा रहता हूं, मगर जलता नहीं हूं मैं।
इस तरह जिंदगी अपनी गुलजार बना लेता हूं मैं।।
अन्य जिन कवियों ने काव्य पाठ किया उनके नाम है- सर्व श्री चंद्रगुप्त प्रसाद वर्मा 'अकिंचन' दानिका प्रसाद विश्वकर्मा, राम समुझ 'सांवरा' हाजी मकबूल अहमद 'मंसूरी' , सुरेंद्र मोड़, कुन्दन वर्मा पूरब, डा .सत्य नारायण 'पथिक', अरविंद 'अकेला', सुधीर श्रीवास्तव 'नीरज' , राम सुधार सिंह सैथवार, अरुण ब्रम्हचारी आदि।
श्रोताओं में अस्पताल के मुख्य सहयोगी डा.एस.एन. सिंह एवं प्रबंधक अजय श्रीवास्तव एवं हास्पिटल के सभी स्टाफ गण उपस्थित रहे।
अंत में संस्था के प्रबंध निदेशक डा.ए.पी. गुप्ता जी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा- हम सभी आज बहुत ही गदगद है, अपने बीच में प्रो. अनिल राय जी को पा कर और वरिष्ठ शायर महमूद भाई को। उन्होंने सभी कवियों को साधुवाद देते हुए कहा कवि और उनकी कविता समाज में परिष्कार का कार्य करती है।
