सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा वर्षा
*प्रथम नाम गनेश को लीजिए, जा सुमिरे होए सिद्बि काम।*
पौराणिक ग्रंथकारो ने तो मधु -कैटभ के प्रसंग में श्री विष्णु जी को और त्रिपुरासुर प्रसंग में शिवजी तक को असहाय दर्शाया। मात्र इसलिए की मुख्य देवों ने दैत्य से युद्ध करने से पूर्व श्री गणपति (अर्थात ब्रह्म) को स्मरण नहीं किया था। तात्पर्य यह है कि श्री विष्णु जी व शिव जी की यह लीला हमें यही समझता है कि चाहे कोई सर्वोच्च कौशल, समर्थ देवी संपदा से भी परिपूर्ण क्यों न हो-परंतु ब्रह्म याने गणेश केंद्रित साधना या सुमिरन के बिना कर्म में परिपूर्णता संभव नहीं है। अर्थात उस एक शाश्वत, आदि- नाम का प्रथम सुमिरन करो इसके विषय में रामचरितमानस रहती है-
*महामंत्र जोई जपत महेसू। कासीं मुकुति हेतु उपदेसु।।*
*महिमा जासु जान गनराऊ। प्रथम पूजियत नाम प्रभाऊ।।*
यही है अग्र पूजा विधान का आंतरिक रहस्य!
ॐ श्रीं आशुतोषाय नमः
श्री सियाबिहारी जी ✍️

