**हम या तो बीते हुए कल को कोसते रहते हैं या फिर आने वाले कल के बारे में कल्पना करते रहते हैं।**

सर्व श्री आशुतोष महाराज जी का चिंतन(अनमोल वचन) प्रस्तुतिकरण श्री आर सी सिंह जी।

शिल्पकार लोरेन्जो क्विन कहते हैं - "मेरा मानना है कि जीवन तीन स्तम्भों पर खड़ा है - पत्थर, लकड़ी और काँच। बीता हुआ कल वह है, जो एक पत्थर पर अंकित हो चुका है। आज वह पल है, जो लकड़ी के समान है जिसे आसानी से तराशा जा सकता है। आने वाला कल एक खाली शीशे के ग्लास के समान है, जिसमें हमारे सपने सच होकर खुशी भरेंगे।"

   पर हम हमारे जीवन में कैसी छलांग भर रहे हैं? जी हाँ, हम झूल रहे हैं अपने बीते हुए कल और आने वाले कल के बीच में। हम या तो बीते हुए कल को कोसते रहते हैं या फिर आने वाले कल के बारे में कल्पना करते रहते हैं। वर्तमान को गढ़ने की कला तो हम अपना ही नहीं रहे हैं। फिर कैसे हमारे सपने साकार होकर हमें खुशी देंगे? इसलिए आवश्यकता है, वर्तमान में जीने की। कड़ी मेहनत से उसे निखारने की।

**ओम् श्री आशुतोषाय नम:**

"श्री रमेश जी"

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