सर्व श्री आशुतोष महाराज जी का चिंतन(अनमोल वचन) प्रस्तुतिकरण श्री आर सी सिंह जी।
हमारे जीवन में क्रोध किसी न किसी रूप में, किसी न किसी के द्वारा मिलता ही रहता है। अगर हम क्रोध का जवाब क्रोध से ही देते हैं, तो अंत में हानि हमारी ही होती है।
दरअसल क्रोध वह पिशाच है, जो हमारे क्रोध से और बलवान होता चला जाता है। परंतु जब वह आए तो हमारे शांत व्यवहार से उसका बल क्षीण हो जाता है और वह भाग जाता है।
बस यही रामबाण है क्रोध के पिशाच को खत्म करने का। अगर हम क्रोध की प्रतिक्रिया क्रोध से करने लग जाते हैं तो वह आग में घी डालने जैसा होता है। इसलिए यदि कोई आप पर क्रोध में कटु शब्दों से प्रहार करता है, तो आप विवेक और संयम का परिचय दें। शांत होकर परिस्थिति का सामना करें। यह क्रोध के पिशाच को दुर्बल कर देगा। घर-परिवार-आफिस में क्लेश मिटाने का यह एक महत्वपूर्ण सूत्र है।
**ओम् श्री आशुतोषाय नम:**
"श्री रमेश जी"
