सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा वर्षा
अध्यात्म का विज्ञान हमें ठोस व स्थायी उपचार प्रदान करता है। ब्रह्मज्ञान का विज्ञान हमारी सोच की गुणवत्ता से चेतना के स्तर में बदलाव नहीं लाता। अपितु चेतना को उर्ध्वमुखी बनाकर सोच के स्तर को ऊपर उठा देता है। ब्रह्मज्ञान की दीक्षा के माध्यम से पूर्ण गुरु हमारी चेतना को आत्मा के प्रकाश में स्थित होना सीखा देते हैं। ऐसे में विचार रूपी मन निचली (तनावयुक्त) गुणवत्ता के स्थान को छोड़ देता है। ऊंची गुणवत्ता के स्थान में पहुंच जाता है। इस अवस्था में केवल आनंद शांति आपसी सौहार्द इत्यादि का स्थान होता है। साधक नियमित तौर पर ब्रह्मज्ञान की साधना करता है, निरंतर सुमिरन से जुड़ा रहता है; तो उसकी चेतना ऊघर्वमुखी बनी रहती है। परिणामस्वरूप उसके विचारों की गुणवत्ता भी उच्चस्तरीय रहती है। मतलब वो तनाव, भय इत्यादि से ग्रस्त नहीं होता।
ॐ श्री आशुतोषाय नमः
श्री सियाबिहारी जी ✍️