सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा वर्षा
अरे क्या तू यह बाहरी घड़ी को घुर रहा है? तेरी जीवन की घड़ी की सुइयां तो आगे बढ़ती जा रही है। टिक -टिक के साथ एक-एक क्षण बीता जा रहा है। जैसे ही जिंदगी का समय पूरा होगा, घंटा बजा दिया जाएगा। तेरे अंत का निनाद होगा। तेरा मिट्टी के बर्तन जैसा शरीर टूट कर बिखर जाएगा। उसके भीतर से प्राण -शक्ति उड़न छू हो जाएगी। इसलिए हे मानव, अपना धन दौलत, पद की अहंकार छोड़, तू अपनी जीवन की घड़ी की ओर भी ध्यान कर!
महापुरुषों का वचन है-'जब तक जीवन की घड़ी घंटा नहीं बजती, तब तक तू भीतर का घंटा सुन।-
*नव पौरी पर दसवं दुवारा*।
*तेहि पर बाज राज घरियारा*।।
तेरे शरीर में नौ द्वारा हैं, जो बहिर्मुखी है। पर इससे ऊपर मस्तक पर दसवां द्वार है, जो अंतर्मुखी है। इस दशम द्वार पर ही राज घड़ी है, जो घंटा बजा रही है। इसे अनहद नाद, अनहद वाणी, दिव्या संगीत, आदि नाम से संबोधित किया गया है। तू इस राज घड़ी के घंटे को सुन। अनहद नाद के श्रवण कर। क्योंकि जब तुम नौ द्वारों को पार कर दशम द्वार पर पहुंचेगा, तो तू ब्रह्मांड में पहुंच जाएगा। वहा तुझे अमृत प्राप्त होगा। ऐसा महान अमृत, जिसको पाने के लिए बड़े-बड़े राजा भी राजपाट त्याग कर सन्यासी हो जाते हैं।
अतः ऐसा वो आध्यात्मिक का मार्ग है। ब्रह्मानंद रूपी घंटा है, जिसे पूर्ण गुरु ब्रह्मज्ञान देकर हमारे भीतर प्रकट करते हैं। उसे सुनकर जीवन सार्थक हो जाता है। साधक मृत्युंजय अवस्था को प्राप्त कर लेता है। मृत्यु से पूर्व ही अमरत्व पा जाता है।
ॐ श्री आशुतोषाय नमः
श्री सियाबिहारी जी ✍️
