सर्व श्री आशुतोष महाराजजी का चिंतन(अनमोल वचन) प्रस्तुतिकरण श्री आर सी सिंह जी।
मनुष्य का आध्यात्मिकता से बहुत गहरा सम्बन्ध है। संसार में जन्म लेने का मूल उद्देश्य ही आध्यात्मिक जगत की प्राप्ति करना है। लेकिन भौतिक जगत में जन्म लेने के बाद मनुष्य शरीर की जरूरतों को जानकर केवल शरीर के बन्धनों में ही जकड़ कर रह जाता है। मनुष्य अपने जीवन के वास्तविक रहस्य को भूल चुका है।
जिस तरह भौतिक जगत की जानकारी के लिए मनुष्य का जन्म जरूरी है इसी तरह आध्यात्मिक जगत की जानकारी लेने के लिए मनुष्य जीवन में आत्मा का जन्म होना भी अति आवश्यक है। मनुष्य जन्म लेने के बाद ही भौतिक जगत की जानकारी प्राप्त कर पाता है। जब एक बालक जन्म लेता है तब उसे जगत तो क्या शरीर के परिपालन के बारे में भी जानकारी नहीं होती। जब वह धीरे-धीरे बड़ा होता है, तब वह शरीर के विषय में जानकारी प्राप्त करता जाता है।
मनुष्य की स्थिति यह है कि वह शरीर की जरूरतों के विषय में तो जानकारी प्राप्त कर लेता है। परंतु अध्यात्म का विषय नीरस लगता है, क्योंकि आध्यात्मिक जगत की जानकारी से वह अनभिज्ञ है। कुछ व्यक्ति आध्यात्मिक जगत में प्रवेश पाने के लिए अनेक क्रियाओं की साधना में लग जाते हैं। परंतु शास्त्रों में स्पष्ट किया गया है कि हम कितने भी उपाय कर लें, स्वयं को जाने बिना आध्यात्मिक जगत में प्रवेश करना असम्भव है।
जिस प्रकार शरीर के जन्म के बिना भौतिक जगत की जानकारी नहीं होती, इसी प्रकार आत्मा के जन्म के बिना आध्यात्मिक जगत की जानकारी नहीं हो सकती।
**ओम् श्री आशुतोषाय नम:**
"श्री रमेश जी"
