*"भक्ति का शोर लेकिन बदलाव का मौन"*

        सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा वर्षा 

आजकल हम भक्ति के नाम पर बहुत कुछ कर रहे हैं। रंग बिरंगे कपड़े पहन कर रोड़ पर बैंड बाजा के साथ निकालना-हर दिन मंदिर जाना, पूजा पाठ करना, मंत्र जाप, लेकिन फिर भी बदलाव की कमी बनी हुई है। रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है कि- *"गुरु बिन भक्ति अधूरी"* अर्थात सच्ची भक्ति गुरु के बिना पूरी नहीं होती। कबीर दास जी भी कहते हैं, *"गुरु बिना ज्ञान ना होइ"* यानी बिना गुरु के सही दिशा में ज्ञान नहीं मिलता। गुरु हमें दिखाते हैं भक्ति सिर्फ बाहरी रसम  नहीं, बल्कि आत्म परिवर्तन का एक साधन है। जब हम पूर्ण गुरु से ब्रह्मज्ञान के सिख को अपनाते हैं और अपने अंतर्घट मैं प्रकाश स्वरूप ईश्वर का दर्शन करते हैं, तो हमारी भक्ति शब्दों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि हमारे कर्म, हमारे विचार, और हमारे जीवन में बदलाव लाती है। इसलिए, जब तक गुरु का मार्गदर्शन नहीं , तब तक भक्ति का शोर तो होता है ,लेकिन बदलाव का मौन बना रहता है।

ॐ श्री आशुतोषाय नमः 

श्री सियाबिहारी जी ✍️

नोट:- लेख का उद्देश्य किसी को हानि अथवा ठेस पहुंचाना नहीं है।लेख, लेखक के अपने विचार है इसमें प्रकाशक की सहमति आवश्यक नहीं है।

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