सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा वर्षा
पर्यावरण वो नहीं जो हमारे चारों ओर है, पर्यावरण वो है जो हमारे भीतर बसता है।
जैसे माँ की गोद में बच्चा सुरक्षित रहता है, वैसे ही पर्यावरण की गोद में ये पूरी सृष्टि सुरक्षित है। पेड़ हमारे फेफड़े हैं, नदियाँ हमारी नाड़ियाँ हैं, और ये धरती हमारी माँ।
आज हम भूल गए हैं कि हमने पेड़ों से सिर्फ लकड़ी नहीं ली, हमने उनसे साँसें ली हैं। हमने नदियों से सिर्फ पानी नहीं लिया, हमने उनसे जीवन लिया है।
जब एक बीज अंकुरित होता है तो वो सिर्फ पेड़ नहीं बनता, वो सैकड़ों पक्षियों का घर बनता है, थके हुए राही की छाया बनता है, और आने वाली पीढ़ी की साँस बनता है।
*पर्यावरण आज रो रहा है -*
धुएँ से आसमान काला हो रहा है,
प्लास्टिक से धरती घुट रही है,
और हमारे ही शोर में चिड़ियों की चहचहाहट कहीं खो रही है।
पर्यावरण को बचाना कोई बड़ा विज्ञान नहीं है,
एक पेड़ लगाना, एक नल बंद करना, कचरा कम करना - यही सच्ची पूजा है।
याद रखिए -
हम पर्यावरण के मालिक नहीं, हम इसके रखवाले हैं।
ये हमें हमारे दादा-परदादाओं से विरासत में नहीं मिला, बल्कि हमारे बच्चों से उधार लिया है।
*तो आइए, आज एक वादा करें -*
धरती को हरा-भरा रखेंगे,
जल को निर्मल रखेंगे,
और वायु को स्वच्छ रखेंगे।
क्योंकि जब पर्यावरण बचेगा, तभी जीवन बचेगा।
ॐ श्री आशुतोषाय नमः
श्री सियाबिहारी जी ✍️
