कार्यक्रम में प्रस्तुति देती हुई लोक गायिका संजू सिंह
*अवधी, भोजपुरी, पूर्वी की प्रस्तुतियों से सुरमयी हुई देवा मेले की सांस्कृतिक संध्या*
बाराबंकी, 31 अक्टूबर। देवा मेला एवं प्रदर्शनी-2026 के सांस्कृतिक आयोजनों की श्रृंखला में शनिवार को आयोजित ‘स्वर झंकार’ कार्यक्रम लोकसंगीत की बहुरंगी छटा और भक्तिरस की अविरल धारा से सराबोर रहा। आकाशवाणी एवं दूरदर्शन की प्रख्यात कलाकार तथा सुप्रसिद्ध लोकगायिका संजू सिंह ने अपनी मधुर, प्रभावशाली एवं भावपूर्ण गायकी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
संगीतमयी संध्या में उन्होंने भक्ति, लोकआस्था, प्रेम, विरह और ग्रामीण जनजीवन से जुड़े विविध लोकगीतों की मनोहारी प्रस्तुतियां दीं। ‘जो रब है वही राम है’ भजन ने सर्वधर्म समभाव और आध्यात्मिक एकात्मता का संदेश दिया। इसके साथ ‘जय-जय छठी महारानी’ छठगीत, ‘ना जाने झुलनी का हाल रे’, ‘के खटकावे केवड़िया ना’, ‘सईयां बड़ा बेइमान हो’ और ‘खो गइले बलमा हमार, रखी रे देवा के मेला में’ जैसे गीतों ने लोकजीवन की सहज संवेदनाओं को सुरों में अभिव्यक्त किया। कबीर के निर्गुण भजन ‘दाग कहां से लागल चूनर में’ सहित देवी गीत, झूमर, बारहमासा और बिदेसिया गीतों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को विशिष्ट सांस्कृतिक आयाम प्रदान किया।
कार्यक्रम में ढोलक पर पं. सुभाष कन्नौजिया, बैंजो पर दीना, हारमोनियम पर चन्द्रेश पाण्डेय तथा साइड रिदम पर मुकेश विश्वकर्मा ने अपनी सधी हुई संगत से गायन की मधुरता में चार चांद लगा दिए।
की मिठास, सुरों की साधना और सांस्कृतिक विरासत की जीवंत अभिव्यक्ति से सजी इस संध्या ने देवा मेले के वातावरण को संगीतमय बना दिया। दर्शकों ने तालियों की गूंज के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
उमाकांत बाजपेयी,
शासकीय मान्यता प्राप्त पत्रकार
