दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के तत्वावधान सन शाइन स्कूल के पास, चौबेपुर, वाराणसी में दोपहर 3 बजे से साम 6 बजे तक पांच दिवसीय हरि कथा का आयोजन किया गया है।
स्वामी श्री अर्जुनानंद जी
सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य स्वामी अर्जुनानंद जी ने कार्यक्रम के चतुर्थ दिवस में भक्तों को शिव स्वरूप का विश्लेषण करते हुवे इसके आध्यात्मिक पहलुओं को रखते हुवे कहा, भगवान शिव का श्रृंगार हमारी पूजा पद्धति से जुड़ी हुई है। जैसे जटाओ से गंगा का निकलना अर्थात हमे नदियों से प्रेम होना चाहिए , प्रकृति से प्रेम करने वाला मनुष्य सहज ही परमात्मा से प्रेम करने लगता है,
आज हम भक्ति नाम पर विभिन्न कर्मकांड करते है । भारत की पूजा पध्दति अत्यंत बैज्ञानिक है।जैसे पीपल में जल चढ़ाने के पीछे कारण पर्यावरण शुद्ध हो क्योंकि पीपल चौबीस घंटा ऑक्सीजन देता है, तुलसी को इसलिए पूजा जाता है क्योंकि तुलसी एन्टी बेक्टरीअल होता है । इसलिय भारत की पूजा पद्दति अनेक रोगों से मुक्ति देने में सहायक है। शास्त्रो में वर्णन आता है , यह शरीर ही भगवान का घर है। पूजा इसी शरीर मे हो सकता है परंतु आवस्यकता है एक पूर्ण संत की।पूर्ण संत जीवन में आकर भक्ति को प्रकट कर सकते है। भक्ति का अर्थ बाहर का करकाण्ड भर नही बल्कि इसी मनुष्य घट में ईश्वरीय तत्व का दर्शन कराना है। ईश्वर प्रकाश रूप में हमारे भीतर विधमान है, उसको देखा जा सकता है।शिव जी के मस्तक पर तीसरा आँख का अर्थ भी आध्यात्मिक है ,पूर्ण संत उसी दिव्य नेत्र को खोलकर उसी ईश्वरीय परम प्रकाश का दर्शन करवाते है,उसके बाद ही हम ध्यान के सनातन बिधि से जुड़ सकते है। परम पूज्य गुरुदेव सर्व श्री आशुतोष महाराज जी केवल भगवान की बात नही करते है , दिव्य नेत्र प्रदान कर भगवान का दर्शन भी अंतर्गट में करवाते है।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी श्री शिवसरणानंद जी ने मंत्र ध्वनि व प्रार्थना से किया ।कार्यक्रम का मंच संचालन करते हुवे स्वामी श्री हरिप्रकाशानंद जी ने भक्तो को सम्बोधित करते हुवे कहा ब्रह्मज्ञान ही है जो मनुष्य के जीवन को पावन व सुखमय बना सकती है।सर्व श्री आशुतोष महाराज जी ने विस्व शांति का आवाहन किया है । कार्यक्रम का समापन मंगल आरती से किया गया। मंच से भाववान के सुमधुर भजन का गायन स्वामी श्री शिवसरणानंद जी, भाई योगेश जी , राणा भाई, अलका काजल , ऋचा , सुषमा जी ने किया ।
महाराज जी की अनंत कृपा है।
ReplyDelete