*भारतीय संस्कृति के सत्य स्वरूप को जनमानस तक पहुंचाएं*

 सर्व श्री आशुतोष महाराज जी का चिंतन(अनमोल वचन) प्रस्तुतिकरण श्री आर सी सिंह जी।

                                 श्री आर सी सिंह जी 

आज आतंकवाद से पूरा विश्व त्रस्त है। इसको जड़ से खत्म करने के लिए साम दाम दंड भेद, सब नीतियों का प्रयोग किया जा रहा है। पर चिंता का विषय यह है कि जहाँ इस आतंकवाद से लड़ने के भरसक प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इसका एक दूसरा घिनौना रूप भी फलता फैलता दिखाई दे रहा है। आतंकवाद के इस घिनौने रूप का नाम है - बौद्धिक आतंकवाद, जो हमारे देश की जड़ों, उसकी संस्कृति को विषाक्त कर रहा है।

     बौद्धिक आतंकवाद की सबसे पहली चाल है- हम भारतीयों की धार्मिक भावनाओं को आहत करना। हमारे आराध्यों और ईष्टों की गलत छवि प्रस्तुत करना। धर्म ग्रंथों को अवैज्ञानिक व काल्पनिक सिद्ध करना।

 लेखनी से फैलाया जा रहा है बौद्धिक आतंकवाद।

*रामायण पर कुठाराघात*

रामायण - वह ग्रंथ जो सदियों से भारत का आदर्श ग्रंथ है। किंतु आज बौद्धिक आतंकवादियों ने हमारे इस ग्रंथ पर प्रहार कर इसका स्वरूप बिगाड़ दिया है।

      कुछ समय पूर्व तक दिल्ली विश्वविद्यालय के बी. ए. कोर्स में ए. के. रामानुजन द्वारा लिखित एक लेख पढ़ाया जाता था। उसका नाम था - '300 रामायण'। उस लेख में प्रसंग कहता है - 'संतान प्राप्त करने हेतु रावण और उसकी पत्नी मंदोदरी ने वन में कठोर तपस्या की। तपस्या से प्रसन्न हो दम्पत्ति को भगवान से आम्र फल का प्रसाद मिला। इस प्रसाद का सेवन मंदोदरी नहीं करती, बल्कि रावण कर लेता है जिससे वह गर्भवान हो जाता है। कुछ महीनों बाद रावण को एक छींक आती है और तब उसकी नासिका के रास्ते से सीता का जन्म होता है। याने सीता रावण की छींक से पैदा हुई थी।'

       अब बताइए, क्या हमारे पवित्र ग्रंथों के साथ ऐसी ओछी छेड़छाड़ करना उचित है? इसके पीछे गहरा षडयंत्र है। किनका? बौद्धिक आतंकवादियों का। मकसद है युवाओं को भारतीय संस्कृति के आदर्शों से पथभ्रष्ट करना।

*श्रीमद्भगवद्गीता पर कुठाराघात*

   आपको जानकर हैरानी होगी कि इन बौद्धिक आतंकवादियों ने भगवद् गीता को 'शैतान कोष' करार दे दिया। केदार जोशी नामक एक बुद्धिजीवी ने एक पुस्तक लिखी- 'The Satanic Verses of Bhagavad Gita' अर्थात् 'भगवद्गीता के शैतानी छंद'।

     ऐसा ही एक और बौद्धिक आतंकवादी है, मेघनाद देशाई। वह अपनी पुस्तक- 'Who wrote the Bhagavad Gita- A Secular Enquiry Into a Sacred Text' में लिखता है - 'गीता जातिवाद फैलाती है। गीता में ऐसे संदेश हैं जो पुरुषों को ऊपर और महिलाओं को निचले स्थान पर रखते हैं।

     इसलिए भारतीयों, सतर्क हो जाओ उन शैतानों की कुचालों से जो हमारे दिव्य ग्रंथों को शैतान कोष कहकर बौद्धिक आतंकवाद फैला रहे हैं।

*गुरु शिष्य परम्परा पर कुठाराघात*

   शिकागो यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर वैन्डी डोनिगर और उसके स्टूडेंट जैफरी कृपाल, कहने को बुद्धिजीवी हैं, पर असलियत में हैं बौद्धिक आतंकवादी। इन्होंने अपनी प्रदूषित सोच के चलते भारत के महान गुरु शिष्य सम्बन्ध को भी अभद्र रूप देने का कुप्रयास किया। जैफरी ने एक पुस्तक लिखी - 'कालीज चाइल्ड (माँ काली का पुत्र)'। इस पुस्तक में लिखा है - 'रामकृष्ण एक समलैंगिक तान्त्रिक थे। ये युवा लड़कों के प्रति आकर्षित रहते थे। इसलिए अपने किशोर शिष्यों के साथ अनैतिक सम्बन्ध रखते थे।

     अत: यह स्पष्ट है कि बौद्धिक आतंकवादियों की लेखनी अनियंत्रित हो जहर उगल रही है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर आज ये दुष्ट कहीं तो हमारे महान ग्रंथों को काल्पनिक, अवैज्ञानिक, शैतानी कोष बतला रहे हैं, और कहीं हमारे आराध्यों को खलनायकों की श्रेणी में खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। पर विडम्बना तो यह है कि हम भारतीयों को लगता है कि यह सारा प्रचार निरुद्येश है। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। हमें यहां समझना होगा कि यह सब इन आतंकवादियों की सोची समझी साजिश के तहत हो रहा है। इनका लक्ष्य है, भारतीय संस्कृति को समूल नष्ट कर देने का।

       अत: भारतवासियों, समय रहते जाग जाइए। भारतीय संस्कृति के सत्य स्वरूप को जनमानस तक पहुँचाएँ।

*ओम् श्री आशुतोषाय नम:*

'श्री रमेश जी'

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