सर्व श्री आशुतोष महाराज जी का चिंतन(अनमोल वचन) प्रस्तुतिकरण श्री आर सी सिंह जी।
श्री आर सी सिंह जीजब भी किसी बात से मन घबराने लगता है, मुश्किलें चारों ओर से हम पर हावी हो जाती हैं तब मन के किसी कोने में, चाहे हल्की ही सही, पर यह आस होती है भगवान सब ठीक करेंगे! लेकिन इस दुनिया में कुछ ऐसे भी लोग हैं, जिन्हें भगवान से भी डर लगता है! उनके अनुसार अगर जीवन में कुछ ठीक नही है तो उसके लिए भगवान ही जिम्मेदार है! ऐसे ही बहुत से डर हैं, जो कुछ लोगों के भीतर अध्यात्म को लेकर दिखते हैं! इस कारण से वे लोग ईश्वर से दूर ही रहना पसंद करते हैं! कुछ लोगों को आजाद होने से भी डर लगता है!वह अज्ञानता की बेडि़यों में ही जकडे रहना पंसद करता है! उसे इस कैद से इतना मोह है कि वह इससे स्वंतत्र होने की बात सुनना तक पंसद नहीं करता! कैसी विडम्बना है? इन्सान मानसिक कैद की आजादी से हिचकता है! भयभीत रहता है!
एक बार गार्गीय और अजातशत्रु रास्ते से जा रहे थे! वहां एक व्यक्ति गहरी नींद में सोया हुआ था! अजातशत्रु ने उसे सोम देव, राजन जैसे बड़े-बड़े सम्बोधन देकर पुकारा! पर उस व्यक्ति को सुनकर कोई फर्क नहीं पड़ा! तब अजातशत्रु ने कहा नींद में ऊंघ रहे व्यक्ति से कितनी ही बड़ी-बड़ी बातें क्यों न कह दी जाएं, उसे उनसे कोई लाभ नहीं होगा!आवश्यकता है उसे झकझोरकर जगाने की!जागा हुआ व्यक्ति ही कही गई बात को सुन और समझ सकता है।
अजातशत्रु का यह कहना मूलत:आन्तरिक जागृति की और संकेत कर रहा है! क्योंकि जब व्यक्ति अज्ञानता की नींद से जागता है, तब ही वह सच्चाई को सुनने और समझने योग्य बन पाता है! मानसिक गुलामी से मुक्त होने के लिये प्रयास कर पाता है!
*ओम् श्री आशुतोषाय नम:*
'श्री रमेश जी'
