गुरु और भगवान का रिश्ता प्रेम पर आधारित होता है।

सर्व श्री आशुतोष महाराज जी का चिंतन(अनमोल वचन) प्रस्तुतिकरण श्री आर सी सिंह जी।

                               श्री आर सी सिंह जी 

सभी मनुष्यों के सकाम कर्मों को प्रकृति लिखती है। जब इंसान सकाम कर्मों को छोड़ निष्काम भाव से कर्म करने लगता है, तब परमात्मा हमारे निष्काम कर्मों को लिखने लगते हैं। जबकि ज्ञान मार्ग पर चलने वाले मनुष्यों की परमात्मा अंगुली भी पकड़ लेते हैं, लेकिन भक्तिमार्ग पर चलने वाले भक्तों को परमात्मा अपनी गोद में ही उठा लेते हैं।

     भौतिक प्रकृति यानि सतोगुण+रजोगुण+तमोगुण सत्य होने के बावजूद भी इनसे प्रकट अन्य तत्व अनित्य हैं, जो एक निश्चित समय के बाद से समाप्त होते हैं। इसी तरह स्थूल शरीर के मरते ही सभी भौतिक उपलब्धियां समाप्त हो जाती हैं। 

लेकिन सूक्ष्म शरीर में संग्रहित पाप पुण्य का लेखा जोखा, जो भविष्य में कर्मफल व नए कर्म करने की प्रेरणा देते हैं, ही साथ जाते हैं। 

     दुनिया में बने सभी रिश्ते स्वार्थ पर आधारित होते हैं। अतः मनुष्य स्वार्थ की पूर्ति के लिए अनुकूल और स्वार्थ समाप्त हो जाने पर बने हुए रिश्तों में प्रतिकूलता ले आता है। जबकि केवल गुरु और भगवान का ही सभी जीवों के प्रति रिश्ता प्रेम पर आधारित होता है। इसलिए सभी अनुकूल प्रतिकूल परिस्थितियों में भी रिश्ता सदा बना रहता है। 

*ओम् श्री आशुतोषाय नम:*

'श्री रमेश जी'

Post a Comment

Previous Post Next Post