कौन कहे , किसे अपनी भारत मां से प्यार है। कौन है जाफर,कौन है जयचंद, कौन वफादार है ?

 

                             आमंत्रित साहित्यकार बंधु

भागीरथी सांस्कृतिक मंच, गोरखपुर की 760 वी काव्य गोष्ठी संस्था सचिव ब्रजेश राय के आवास पर संपन्न हुई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर अरुण ब्रह्मचारी जी ने व संचालन डा. सत्यनारायण पथिक ने किया। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ भाई बृजेश राय जी की वाणी वंदना से हुआ।

तत्पश्चात कवि सुरेंद्र मोड़ ने आज की राजनीति में, उठा पटक में, यह बात आती रहती है की कौन देश भक्त है? और कौन गद्दार इसको लेकर उन्होंने काव्य पाठ किया। पंक्ति देखें-

कौन कहे , किसे अपनी भारत मां से प्यार है।

कौन है जाफर,कौन है जयचंद, कौन वफादार है ?

उसके बाद नवगीतकार डॉ. जयप्रकाश नायक ने संवेदनाओं पर हो रहे कुठाराघाट को इन शब्दों में प्रस्तुत किया -

सबसे खतरनाक है यारों, आंखों का पानी मर जाना! खतरनाक मरघट सी चुप्पी, मन का संवेदन हर जाना !!

वरिष्ठ गीतकार भाई राम सुधार सिंह सैथवार जी ने ईमान और उपकार की बात यूं की -

आईना बनकर जियो, ईमान बनकर साथ दो!

 बलिदान देकर देश हित, उपकार बनकर साथ दो !!

वरिष्ठ ग़ज़लकार अरुण ब्रह्मचारी जी ने अपनी बात कुछ यूं कहीं -

जलता हुआ चिराग हूं , सूरज तो नहीं हूं !

 जितनी मेरी बिसात है ,काम आ रहा हूं मैं !!

अन्य जिन कवियों ने काव्य पाठ किया उनके नाम है -सर्वश्री नीलकमल गुप्त "विक्षिप्त", बृजेश राय, शशिबिन्दु नारायण मिश्र, और डा. सत्यनारायण "पथिक" आदि।

अंत में सभी के प्रति आभार व्यक्त किया संस्था सचिव भाई बृजेश राय जी ने।

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