रिश्ते खून के अब तो टिकते नहीं, खून रिश्तों का देखो होता यहां।।

 भागीरथी सांस्कृतिक मंच, गोरखपुर की 761वी काव्य गोष्ठी संस्था प्रबंधक डा. सत्य नारायण "पथिक" के आवास पर हुई।जिसके मुख्य अतिथि डॉ.उपेंद्र प्रसाद व अध्यक्षता वरिष्ठ गीतकार सतीश अकेला ने तथा संचालन पथिक ने किया।

                      आमंत्रित साहित्यकार बंधु

काव्य गोष्ठी का विधिवत शुभारंभ सत्य नारायण पथिक द्वारा मां सरस्वती की वंदना से हुई।

वरिष्ठ कवि नील कमल गुप्त विक्षिप्त जी ने चैरेवेति का उदाहरण अपने इस गीत में दिया -

जो बहती नहीं जल की धारा ,

वह बनती भी नहीं कभी अमृत।

वरिष्ठ शायर अरूण ब्रम्हचारी जी ने अपने ग़ज़ल के इस शेर से दिलों को जोड़ने पर प्रश्न किया -

दिलों को जोड़ दें कोई चारासाज है कि नहीं ।

हमारे वतन में इसका इलाज है कि नहीं ।।

मुख्य अतिथि डॉ. उपेंद्र प्रसाद जी ने अपनी रचना में यह कहा की व्यक्ति को अपना मार्ग स्वयं चुनना पड़ता है -

चौराहे की रोशनी का काम/ राह बताना नहीं/ रोशनी में रास्ता /खुद ही चुनना पड़ेगा/हिम्मत से/ रास्ते पर चलना पड़ेगा

अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ गीतकार  सतीश अकेला जी ने रिश्तों की बात अपने इस गीत में इस प्रकार की ,

 रिश्ते खून के अब तो टिकते नहीं,

 खून रिश्तों का देखो होता यहां।।

अन्य जिन कवियों ने काव्य पाठ किया उनके नाम है-  सर्व श्री राम समुझ सांवरा, डॉ अविनाश पति त्रिपाठी, डा. सत्यनारायण पथिक आदि।

श्रोताओं में उपस्थित रहे संजय प्रकाश सिंह, कृष्ण गोपाल विश्वकर्मा, परंजय, आदित्य और शुकदेव।

सभी के प्रति आभार व्यक्त किया डा. सत्य नारायण पथिक ने।

Post a Comment

Previous Post Next Post