साधना सिमरन द्वारा अपनी इन्द्रियों को वश में किया जा सकता है।

 सर्व श्री आशुतोष महाराज जी का चिंतन(अनमोल वचन) प्रस्तुतिकरण श्री आर सी सिंह जी।

                               श्री आर सी सिंह जी 

श्रीमद्भागवत गीता में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं, जिस प्रकार कछुआ अपने अंगों को संकुचित करके खोल के भीतर कर लेता है, उसी प्रकार जो मनुष्य अपनी इन्द्रियों को विषयों से खींच लेता है, वह पूर्ण चेतना में दृढ़ता पूर्वक बना रहता है। अर्थात कहने का मतलब यह है कि किसी योगी भक्त और आत्मसिद्ध व्यक्ति की कसौटी यह है कि वह अपनी योजना के अनुसार इंद्रियों को वश में कर सके। किंतु अधिकांश व्यक्ति अपनी इंद्रियों के दास बने रहते हैं और इंद्रियों के ही कहने पर चलते हैं। इंद्रियों की तुलना विषैले सांपों से की गई है। वे अत्यंत स्वतंत्रता पूर्वक तथा बिना किसी नियंत्रण के कर्म करना चाहती है। भक्त को इन सर्पों को वश में करने के लिए एक सपेरे की तरह अत्यंत प्रबल होना चाहिए। वह उन्हें कभी भी कार्य करने की छूट नहीं देता। शास्त्रों में अनेक आदेश हैं उनमें से  'कुछ करो  'तथा 'कुछ ना करो से  'सम्बद्ध है। जब तक कोई इन करो या ना करो का पालन नहीं करता और इंद्रिय भोग पर संयम नहीं बरतता है तब तक उसका भगवान की भक्ति में टिक पाना असंभव है। इसलिए कछुए से हमें यह सीखने को मिलता है कि वह किसी भी समय अपने अंग समेट लेता है और पुन: विशिष्ट उद्देश्यों से उन्हें प्रकट कर सकता है। इसी प्रकार ईश्वर की भक्ति में जुड़े व्यक्तियों की इंद्रियां भी केवल भगवान की विशिष्ट सेवाओं के लिए काम आती है अन्यथा उनको समेट लिया जाता है। इसलिए भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि वे अपनी इंद्रियों को आत्मतुष्टि में ना करके भगवान की सेवा में लगाए।  श्री कृष्ण भगवान ने कछुए के उदाहरण द्वारा बहुत अच्छा समझाया कि अपनी इंद्रियों को समेटे रहता चाहिए। श्री आशुतोष महाराज जी भी इसीलिए ब्रह्म ज्ञान पर बहुत जोर देते हैं। ब्रह्म ज्ञान प्राप्त करके हर मनुष्य साधना सिमरन द्वारा अपनी इंद्रियों को वश में कर सकता है। हमारे ऋषि-मुनियों ने, तत्ववेताओं ने इसीलिए इस आत्मज्ञान रूपी ज्ञान का मार्ग चुना जोकि परम सुंदर और आनंद प्रदान करने वाला है। यदि हमें इस जीवन की पूर्णता को पाना है तो हमें पुरुषार्थी बनना पड़ेगा। तभी हमारा जीवन सार्थक बन सकता है।

*ओम् श्री आशुतोषाय नम:*

"श्री रमेश जी"

Post a Comment

Previous Post Next Post