*श्री कृष्ण भगवान हैं और प्रत्येक वस्तु के मूल स्रोत हैं तथा ब्रह्मा की चरम सीमा हैं।*

 सर्व श्री आशुतोष महाराज जी का चिंतन(अनमोल वचन) प्रस्तुतिकरण श्री आर सी सिंह जी।

                                श्री आर सी सिंह जी 

                     अपरं भवतो जन्म परं जन्म विवस्वत:।

                   कथमेतद्विजानीयां त्वमादौ प्रोक्तवानिती।।

अर्जुन ने कहा -  सूर्यदेव, विवस्वान आपसे पहले हो चुके हैं, तो फिर मैं कैसे समझूं कि प्रारंभ में भी आपने उन्हें इस विद्या का उपदेश दिया था।

तात्पर्य,  जब अर्जुन भगवान का माना हुआ भक्त है तो फिर उसे कृष्ण के वचनों पर विश्वास क्यों नहीं हो रहा था।  सच यह है, अर्जुन यह जिज्ञासा अपने लिए नहीं कर रहा है, अपितु यह जिज्ञासा उन सबों के लिए है जो भगवान में विश्वास नहीं करते हैं अथवा असुरों के लिए है जिन्हें यह विचार पसंद नहीं हैं कि कृष्ण को भगवान माना जाए। उन्हीं के लिए अर्जुन यह बात इस तरह पूछ रहा है मानो वह स्वयं भगवान से अवगत ना हो। अर्जुन भली भांति जानता था कि कृष्ण श्री भगवान हैं और वह प्रत्येक वस्तु के मूल स्रोत हैं तथा ब्रह्मा की चरम सीमा हैं।  निसंदेह कृष्ण इस पृथ्वी पर देवकी के पुत्र रूप में भी अवतीर्ण हुए है। सामान्य व्यक्ति के लिए यह समझ पाना अत्यंत कठिन है कि कृष्ण किस प्रकार उसी शाश्वत आदि पुरुष  भगवान के रूप में बने रहे।  इसलिए इस बात को स्पष्ट करने के लिए ही अर्जुन ने कृष्ण से यह प्रश्न पूछा,  जिससे वे ही प्रमाणिक रूप में बताएं। कृष्ण परम प्रमाण है,  यह तथ्य आज ही नहीं अनंत काल से सारे विश्व द्वारा स्वीकार किया जाता रहा है।  केवल असुर ही इसे  अस्वीकार करते रहे हैं। जो भी हो, क्योंकि कृष्ण सर्व स्वीकृत परम प्रमाण हैं इसलिए अर्जुन उन्हीं से प्रश्न करता है जिससे कृष्ण खुद बताएं। यह प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है कि अपने कल्याण के लिए वह कृष्ण द्वारा बताई गई परा विद्या को जाने।  इसलिए जब कृष्ण खुद अपने विषय में बोल रहे हों तो यह सारे विश्व के लिए शुभ है।  जो कृष्ण को भगवान नहीं मानते थे उनके लिए कृष्ण द्वारा की गई व्याख्यायें उन्हें सही ना लगे किंतु जो भक्त हैं वह साक्षात कृष्ण द्वारा उच्चारित वचनों का हृदय से स्वागत करते हैं। ऐसे भक्त कृष्ण के ऐसे प्रमाणिक वचनों की सदा पूजा करेंगे क्योंकि वह लोग उनके विषय में अधिकाधिक जानने के लिए उत्सुक रहते हैं। अर्जुन की कोटि के श्री कृष्ण भक्त को कभी भी श्री कृष्ण के दिव्य स्वरूप के विषय में कोई भ्रम नहीं हो सकता।  अर्जुन द्वारा भगवान के समक्ष ऐसा प्रश्न पूछने का उद्देश्य उन व्यक्तियों को चुनौती देना था जो श्रीकृष्ण को भौतिक प्रकृति के गुणों के अधीन एक सामान्य व्यक्ति मानते हैं।  कहने का मतलब है अर्जुन श्री कृष्ण भगवान का बहुत बड़ा भक्त था। अन्य लोगों को सच की राह कैसे पता चले इसलिए उसने श्री कृष्ण भगवान से सब की भलाई के लिए यह प्रश्न पूछा।

*ओम् श्री आशुतोषाय नम:*

"श्री रमेश जी"

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