साध्वी सुश्री कालिंदी भारती जी,
श्रद्धालुओं को संबोधित करती हुई।
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर सात दिवसीय श्रीमद भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया गया है। कथा के तृृतीय दिवस में महिमामय सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या सुश्री कालिंदी भारती जी ने तृृृृतीय स्कंध् का बहुत ही भव्य प्रस्तुतीकरण किया।
पष्ठम् स्कंध् का व्याख्यान करते हुए साध्वी जी ने कहा कि अजामिल ने एक अश्लील दृश्य देखा और वह पतन के गर्त में गिर गया। यदि आज के परिवेश में देखा जाए तो हमारे चहुंचोर अश्लीलता ही अश्लीलता है। अश्लील फल्मी पोस्टर गलियों में, बाजारों में देखने को मिल जाते हैं, अश्लील गाने सुन को मिल जाते हैं। आज मानव ने वासना व अश्लीलता की हदें ही पार कर दी है। एन2एच2 के डेटाबेस के हिसाब से इंटरनेट पर सन् 1998 में 140 लाख अश्लील पृष्ठ थे। सन् 2003 में ये बढ़कर 2600 लाख और सन् 2004 में 4200 लाख हो गए। आज छः व सात वर्षो के उपरांत ये 20 गुणा बढ चुके हैं। 8-16 वर्ष के बच्चों में से 90 बच्चे अपना होमवर्क करते हुए इंटरनेट पर अश्लील चित्र देखते हैं बालक ही नहीं हर वर्ग व आयु आज कामुकता की इस शर्मनाक दौड़ में हांफ रहा हैं। इंटरनेट के सर्च इंजन्स 35 बार शीलहीन या अभद्र विषयों और वेबसाइटों की खोज करने में व्यस्त होते हैं। आप विचार करें आज कितनी अश्लील फल्में, अश्लील गाने, हैं जिनमें रिश्ते नातों की मर्यादा खत्म कर दी जाती है। और जब कोई ऐसी फिल्म देखेगा चाहे वह बच्चा हो या नौजवान उसका मन कितना दूषित हो जाएगा। दूषित वे वासना से पूर्ति मन के कारण बलात्कार जैसी घटनाएं घट रहीं हैं, नारी शोषण हो रहा है। रिश्तों की पवित्र मर्यादा वासना की वेदी पर चढ़ती जा रहीं है। चरित्र दिन प्रति दिन गिरता ही जा रहीं हैं। यदि चरित्र गिर गया तो समझे सब कुछ चला गया। तभी महापुरुषों ने कहा कि चरित्र की रक्षा करना तो प्रत्येक मनुष्य का प्रथम कर्त्तव्य है। चरित्र हमारे जीवन का सबसे अनमोल रत्न है। यही हमें सफलता की उचाइयों या पतन की खाइयों में धकेलता है। शिक्षा के द्वारा चरित्र का निर्माण नहीं हो सकता क्यों कि रावण भी शिक्षित था परंतु उसका आचरण गिरा हुआ हैं, आज शिक्षित कहलवाने वाला वर्ग चरित्रहीन हो रहा है। सद्चरित्रता शिक्षा व बाह्य परिस्थितियों पर निर्भर नहीं करती। शास्त्र कहते हैं- ‘पहले जागरण, फिर सदाचरण’ जागरण की नींव पर ही सुंदर आचरण की दीवार का निर्माण संभव है। जागरण का भाव अपने भीतर के तत्त्व रूप का दर्शन करना। यह केवल एक पूर्ण गुरू की कृपा से ही संभव होती है। जागरण के पश्चात् मनुष्य जान लेता है कि उसमें परमात्मा की सत्ता विराजित है। फिर धीरे - साधना-सुमिरन द्वारा उसके कलुषित विचार, दुर्भावानाएं एवं बुरे संस्कार ज्ञानाग्नि में भस्म हो जाते हैं। उसका चरित्र बिखर जाता है।
संस्थान की ओर से सुश्री भारती पूर्णिमा जी, किरण भारती जी, सालोक्या भारती जी, ममता भारती जी भारती जी, हरिअर्चना भारती, स्वामी यशेश्वरानंद जी, सुनील जी, स्वामी अमृत जी, हरीश जी ने सुमधुर भजनों का गायन कर संगत को मंत्रमुग्ध् किया। कथा में आज भरी संख्या में श्रद्धालु कथा का आनंद लेते नजर आए पंडाल खचा खच भरा हुआ था लोग बाहर अंत तक जमे रहे,सभी खूब नाचे और झूमे भी।
आज के मुख्य यजमान श्री पुष्प दंत जैन उपाध्यक्ष उत्तर प्रदेश व्यापारी कल्याण बोर्ड उत्तर प्रदेश सरकार।श्री राजेश तुलस्यान जी,श्री आर सी सिंह जी। आज मुख्य के मुख्य अतिथि श्री प्रभाकर दुबे जी चेरमन, डा डी के राय जी, श्री विष्णु धर दुबे,श्री प्रदीप पांडे,श्री सुरेश द्विवेदी आदि तमाम गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
