*बहुत कुछ सिखाते हैं भगवान श्री गणेश*

सर्व श्री आशुतोष महाराज जी का चिंतन(अनमोल वचन) प्रस्तुतिकरण श्री आर सी सिंह जी।

                                श्री आर सी सिंह जी 

गण का अर्थ होता है समूह। यह पूरी सृष्टि परमाणुओं और अलग-अलग ऊर्जाओं का समूह है। यदि कोई सर्वोच्च नियम इस पूरी सृष्टि के अलग-अलग संस्थाओं के समूह पर शासन नहीं कर रहा होता तो इसमें बहुत उथल-पुथल हो जाती। इन सभी परमाणुओं और ऊर्जाओं के समूह के स्वामी हैं भगवान श्री गणेश जी।   गणेश का शाब्दिक अर्थ है गणों का स्वामी। अर्थात वे ही वो सर्वोच्च चेतना है,  जो सर्वव्यापी है।

गणेश जी का बड़ा पेट उदारता और संपूर्ण स्वीकार को दर्शाता है। उनका ऊपर उठा हाथ रक्षा का प्रतीक है, अर्थात घबराओ मत,  मैं तुम्हारे साथ हूं।  और उनका झुका हाथ, जिसमें हथेली बाहर की ओर है, उसका अर्थ है अनंत दान और साथ ही आगे झुकने का निमंत्रण देना।  यह प्रतीक है कि हम सब एक ना एक दिन इस मिट्टी में मिल जाएंगे।  गणेश जी एक दंत हैं, जिसका अर्थ होता है एकाग्रता। उनके हाथ में जो सामान हैं हम सबकी जिंदगी में उसके भी अर्थ हैं।  वह अपने हाथों में अंकुश लिए हैं, जिसका अर्थ जागृति से है अर्थात जागरण से है और पाश का मतलब है -नियत्रंण।  जागृति के साथ बहुत सी उर्जा उत्पन्न होती है और बिना किसी नियंत्रण के उससे नुकसान भी बहुत हैं। गणपति जी की आंखें छोटी हैं कहते हैं छोटी आंखों वाले व्यक्ति चिंतनशील और गंभीर स्वभाव के होते हैं। गणेश जी की छोटी आंखें हमें यह बताती हैं कि हर चीज को बहुत गहराई अर्थात सूक्ष्मता से देख परख कर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। ऐसा करने वाला व्यक्ति कभी धोखा नहीं खाता।

     हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों ने श्री गणेश जी की दिव्यता को शब्दों के बजाय प्रतीकों के रूप में दर्शाया है। क्योंकि शब्द तो समय के साथ अपना अर्थ बदल लेते हैं। लेकिन प्रतीक कभी नहीं बदलते। इसलिए जब भी हम श्री गणेश का ध्यान करें, हमें इन गहरे प्रतीकों को अपने मन में रखना चाहिए।  गणेश पुराण के अनुसार, भगवान गणेश का जन्म भाद्र मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को हुआ था। इसलिए हर साल भाद्र मास में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश उत्सव मनाया जाता है। गणेश जी को वेदों में ब्रह्मा, विष्णु और शिव के समान आदिदेव के रूप में वर्णित किया गया है।

*ओम् श्री आशुतोषाय नम:*

"श्री रमेश जी"

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