प्रह्लाद इस संघर्ष मे विजयी योद्धा बन पाए तो मात्रा ब्रह्मज्ञान के सहारे ।*साध्वी सुश्री कालिंदी भारती जी*

 

                    साध्वी सुश्री कालिंदी भारती जी,  

                    श्रद्धालुओं को संबोधित करती हुई।

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित की जा रही श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस में सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री कांलिदी भारती जी ने भक्त प्रहलाद के संघर्ष पूर्ण जीवन का बड़ा ही मार्मिकता से व्याख्यान किया। प्रह्लाद के जीवन की घटनाएं बताती हैं कि भक्ति मार्ग पर कोई सूरमा ही चल सकता हैै। उन्हें पहाड़ की ऊंची चोटी से गिराया गया, समुद्र में फिकवाया गया, विष का प्याला दिया गया, काल कोठरी मे बंद किया गया। यह संघर्ष भी उनको विचलित न कर पाया। उनकी इस दृढ़ता को देखकर भगवान को नृृसिंह अवतार लेना पड़ा। प्रह्लाद इस संघर्ष मे विजयी योद्धा बन पाए तो मात्रा ब्रह्मज्ञान के सहारे । जब देवर्षि नारद उनकी माता को ज्ञान दिया तो प्रह्लाद को भी माता के गर्भ मे यह ज्ञान प्राप्त हुआ । कहतेे है जब स्त्री गर्भवती होती है तो माता की समस्त शारीरिक कर्म का व मानसिक विचारों का उसके भ्रूण पर प्रभाव पड़ता हैै। माता के गर्भ से ही संस्कार लेकर उत्पन्न होता है । जैसे अभिमन्यु नेे चक्रव्यूह का भेदन करना माता के गर्भ से ही सीखा, छत्रापति शिवाजी महाराज केे जीवन केे पृृष्ठो का भी अवलोकन करें तो पाएगे कि उनकी माता जीजाबाई समर्थ गुरु रामदास जी से आध्यात्मिक मार्ग दर्शन पाकर ही शिवाजी को निडर व सशक्त राजा बना पाई औैैर यह बात विज्ञान सम्मत भी हैैै, माता केे विचार से ही शिशु का पोषण भी होता हैै। यदि आज की माता ध्रुव ,प्रह्लाद, शिवाजी मराठा जैसे भक्त एवं शूरवीरो को जन्म देना चाहती हैै तो उसे भी पहले रानी मदालसा, जीजाबाई की भांति ही ईश्वर को जानना पड़ेगा । तभी बालकों का शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, चारित्रिक आदि हर स्तर से विकास होगा। फिर यही बालक दिग्भ्रमित समाज की नौका की पतवार संभलने वाले कर्णधार बन सकते हैैैं, देश का सशक्त निर्माता बन सकते हैैं। आज के परिवेश मे बालकोें को मात्र बाहरी शिक्षा दी जा रहीं हैै। जो भौतिक सुख सुविधओं को ही प्रदान करवा सकती हैैै। बौद्धिक विकास करने तक ही सीमित हैैं परंतु भीतर की जड़ता को समाप्त करने में असमर्थ है। यह शिक्षा डाक्टर, इंजीनियर, वकील, अध्यापक व नेता बना सकती हैै लेकिन एक मानव को मानव नहीं बना सकती हैै, मानव की हैवानियत को समाप्त नहीं कर सकती हैै। आज हमारेे समाज को ईमानदार मानवों की आवश्यकता हैैै और ऐसे मानव का गठन एक पूर्ण संत केे कृपा हस्त तले ही हो सकता है।

कथा के मुख्य यजमान श्री पुष्पदंत जैन व्यापारी कल्याण बोर्ड उत्तर प्रदेश सरकार , श्री राजेश तुलस्यान, श्रीमती हरिकेश जी, डा एस. पी. तिवारी, विमला अग्रवाल, सरोज अग्रवाल, गोविंद शरण गुप्ता एवं रवि प्रकाश त्रिपाठी परिवार सहित उपस्थित रहे। कथा में मुख्य अतिथि श्री सुभाष जी प्रांतीय प्रचारक आर. एस. एस., डॉ मंगलेश श्रीवास्तव मेयर, डॉ गोपाल प्रसाद डी डी यू,  श्रीमती सुनीता पांडे एवं रोहित पांडे अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

कल की कथा के पूर्व 10.00 से 11:30 बजे तक श्री अवध ओझा फाउंडर, ऑफ़ यथार्थ आईएएस ,का मोटिवेशनल प्रोग्राम आयोजित है। इसके उपरांत कथा पूर्वत 1.00 बजे से 5.00 बजे तक होगी।

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