इस जहां में जिंदगी मेला दिखाने लाई है,

 


भागीरथी सांस्कृतिक मंच की 762 वी काव्य गोष्ठी संस्था सचिव बृजेश राय जी के आवास पर संपन्न हुई।

 कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ ग़ज़लकार अरुण ब्रह्मचारी जी ने व संचालन राम समुझ सांवरा जी ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ भाई बृजेश राय की वाणी वंदना से हुई।

तत्पश्चात कवि बृजेश राय जी ने मानव मन की दुविधा को इन शब्दों में व्यक्त किया -

संभल संभल के चलो ऐ भाई,

 ना जाने कैसी दुविधा कब मन में है छा जाई।

कवि सत्य नारायण "पथिक" ने आदमी की बात किस प्रकार की-

तमाम मुश्किलों को ओढ़े फिरता  आदमी,

थोड़ी सी बात पर क्यों बिफरता  आदमी।

अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ शायर अरुण ब्रह्मचारी ने जिंदगी की बात इस प्रकार की-

इस जहां में जिंदगी मेला दिखाने लाई है,

 एक दिन उंगली छुड़ाकर भीड़ में खो जाएगी।

अन्य जिन कवियों ने काव्य पाठ किया उनके नाम है सर्वश्री राम समुझ सांवरा, बद्री विश्वकर्मा, कुन्दन वर्मा पूरब आदि।

सभी के प्रति आभार व्यक्त किया भाई बृजेश राय ने।

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