सर्व श्री आशुतोष महाराज जी का चिंतन(अनमोल वचन) प्रस्तुतिकरण श्री आर सी सिंह जी।
श्री आर सी सिंह जीपरमहंस योगानंद जी कहते हैं- यह पृथ्वी जो कभी इतनी विशाल लगती थी, अब मुझे अणुओं से बना एक छोटा गोला दिखती है, जो अंतरिक्ष में घूमता जा रहा है, जो धूप से सेका जा रहा है, जिसके चारों और कई प्रकार की वायु नृत्य कर रही है! यह बस मिट्टी का एक गोला है, जिस पर जीवन अनेकानेक प्रकारों से विकसित होता जा रहा है! इस गोले में, ईश्वर का शब्द अनंत के प्रकटीकरण के रूप में प्रत्येक वस्तु में बसा हुआ है! इस सीमित गोले में होने वाली भीषण उथल-पुथल मानवीय स्वार्थ और मानव की मानव के साथ तथा मानव और समस्त सृष्टि के भीतर विद्यमान परम तत्व के साथ अनबन के कारण हो रही है! चूंकि मानव ने इस भीषण उत्पातों से कोई शिक्षा ग्रहण नहीं की, इसलिए पृथ्वी अब भी विनाशकारी झंझावात भूंकप, बाढ़, रोग और इन सब से भयानक, युद्ध के बादलों से आक्रांत है!
इस जगत को, प्रकृति को और जीवन को, उसकी गरीबी, रोग तथा अन्य सब समस्याओं सहित जीतने का एक तरीका है!नेपोलियन, चंगेज खान और सिकंदर जैसों ने मनुष्यों और भूखंडों पर अपना स्वामित्व स्थापित किया! परंतु उनकी जीत केवल कुछ समय के लिए थी! लेकिन जो जीत ईसा मसीह ने प्राप्त की, वह चिरकालिक है! ऐसी शाश्वत जीत कैसे प्राप्त करें? इसलिए आपको खुद से ही शुरुआत करनी पड़ेगी! आपको शायद ऐसा लगेगा कि लोगों की घृणा को जीतकर उन्हें प्रेम का संदेश देना बेकार है, परंतु आज इसकी जरूरत पहले के किसी भी समय से ज्यादा है!निरीश्वरवादी सिद्धांत धर्म को निकाल बाहर करने के लिए संघर्षरत है! संसार अस्तित्व के एक अनियंत्रित खेल के रूप में आगे बढ़ता जा रहा है!इस प्रचंड तूफ़ान को रोकने के प्रयास में हम सागर में तैरती नन्ही-नन्ही चीटियां से ज्यादा कुछ नहीं लगते!पंरतु अपनी शक्ति को कम मत मानो! सच्ची विजय खुद को जीतने में है! ईसा मसीह ने भी यही किया था! उनकी आत्म-विजय ने उन्हें समस्त प्रकृति पर अधिसत्ता दी! परंतु विज्ञान का प्रकृति और जीवन पर विजय प्राप्त करने का मार्ग भिन्न है!वैज्ञानिक आविष्कारों से जो आशाएं शुरू में उत्पन्न होती हैं, उनसे चिरकालिक कुछ भी प्राप्त नहीं होता! उनके लाभप्रद परिणाम थोड़े समय के लिए ही अनुभव होते हैं, फिर कुछ और भी बदतर सामने आता है, जो मनुष्य के सुख और स्वास्थ्य के लिए खतरा बन जाता है! परम विजय केवल विज्ञान के तरीकों को अपनाने से कभी नहीं मिलेगी! विनाशों के होते हुए भी संसार चलता ही रहेगा और विज्ञान नई-नई विजय प्राप्त करता रहेगा!लेकिन केवल अध्यात्म विज्ञान ही हमें पूर्ण विजय प्राप्त करने का रास्ता दिखा सकता है! क्योंकि जब तक हम अध्यात्म और विज्ञान को साथ में लेकर नहीं चलेंगे, तब तक हम उस सर्वोच्च तक नहीं पहुंच सकेंगे, जो जीवन का लक्ष्य है!
*ओम् श्री आशुतोषाय नम:*
"श्री रमेश जी"
