चुनमुन चिरैया/तुम चहकती रहना /तुम हो तो/ जिंदा हैं आदमी /रहेगा आदमी जिंदा की तरह !

 

                      मंच पर विराजमान 

                 आमंत्रित साहित्यकार बंधु!

जनवादी लेखक संघ एवं भागीरथी सांस्कृतिक मंच, गोरखपुर  के संयुक्त तत्वाधान में  जय प्रकाश मल्ल के आवास पर एक सार्थक कवि गोष्ठी आयोजित हुई। यह  भागीरथी सांस्कृतिक मंच की 766वी काव्य गोष्ठी  रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि जय प्रकाश मल्ल  ने व संचालन वरिष्ठ कवि प्रमोद कुमार  ने किया, जिसमें कवियों ने अपनी 2023 की प्रतिनिधि कविताओं के पाठ किये। हर कविता के साथ उपस्थित जनों ने अपनी पाठकीय टिप्पणियाँ भी रखीं और उन्हें समकालीन सांस्कृतिक सच्चाइयों से ओतप्रोत बताया।

कवि ओंकार नाथ त्रिपाठी जी ने जीवन की सच्चाई को कुछ इस तरह व्यक्त किया -

चलों/गुब्बारा/ खरीदा जाये/और उस/बेच रही बच्ची के/चेहरे पर/ एक मुस्कान /लाया जाये !

कवि कुमार अभिनीत भोजपुरी ने बेटी की बात इस तरह की -

बेटी अस धन मिले सगरी घरन में,खिलि उठे गांव ज्वार !

अस धन पाई के घर मोर महके ,चहकेला घर परिवार।।

 डा. रंजना जायसवाल ने प्रकृति को चिरैया के रूप में व्यक्त करते हुए कविता पढ़ी -

चुनमुन चिरैया/तुम चहकती रहना /तुम हो तो/ जिंदा हैं आदमी /रहेगा आदमी जिंदा की तरह !

अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि जय प्रकाश मल्ल ने श्रोताओं को सोचने पर विवश किया इस कविता के माध्यम से -

नीर प्यार का पाना हो तो,जड़ को गहरे जाना होगा।

नीर गगन में फैला बाहें,शबनम गले लगाना होगा।।

जिन कवियों ने काव्य पाठ किया उनमें  कुन्दन वर्मा पूरब,अरुण ब्रम्हचारी ,प्रदीप सुविज्ञ, वेद प्रकाश, वीरेंद्र मिश्र दीपक, डा.सत्य नारायण पथिक,कलीमुल हक़ व प्रमोद कुमार आदि के नाम उल्लेखनीय हैं

सुधि श्रोताओं में उपस्थित रहे जन संस्कृति मंच के अशोक चौधरी व राकेश श्रीवास्तव ।

सभी के प्रति आभार व्यक्त किया प्रमोद कुमार  ने।

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