सर्व श्री आशुतोष महाराज जी का चिंतन(अनमोल वचन) प्रस्तुतिकरण श्री आर सी सिंह जी।
श्री आर सी सिंह जीसंत एकनाथ जी से एक व्यक्ति ने कहा, महाराज, मैंने जीवन में प्रत्येक दिन पाप किये है! अपने दुर्गुणों को दूर कर अच्छे मार्ग पर चल सकूं, क्या इसका कोई उपाय है? एकनाथ जी ने कुछ पल मौन रहकर कहा, भाई, अब तुम्हारे जीवन के केवल 6 दिन ही शेष रह गए हैं! सातवें दिन ही तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी!पाप ना करने का विचार बहुत देर से तुम्हारे मन में आया है! अब मैं क्या कर सकता हूं? सन्त जी की बात सुन वह घर लौट गया! मृत्यु के डर से अब वह दिन-रात राम नाम का जाप करनेे लगा! सातवें दिन संत एकनाथ उसके घर जा पहुंचे! अपने घर में संत जी के आते ही वह भावविभोर होकर उनके चरणों में गिर गया! एकनाथ जी ने पूछा इन छह दिनों में तुमने कितने पाप किये? महाराज, एक भी नहीं! मेरे मन में हमेशा मृत्यु का डर छाया रहा, इसलिए पाप के बारे में सोच भी नहीं पाया! राम नाम का जाप हर क्षण करता रहा! एकनाथ जी ने कहा मृत्यु को याद रखने वाला मनुष्य पाप से बचा रहता है! अब तुम कभी कोई पाप ना करने का संकल्प ले लो, मृत्यु को सदा याद रखो, तभी तुम्हारा कल्याण हो पाएगा!
*ओम् श्री आशुतोषाय नम:*
"श्री रमेश जी"
