कभी 'साकार' से मत पूछना जलवा गरीबी का , गरीबी अर्थी से फूलों का माला छीन लेती है।

         मंच पर विराजमान साहित्यकार बंधु

भागीरथी सांस्कृतिक मंच, गोरखपुर की 799 वी काव्यगोष्ठी संस्था महासचिव बृजेश राय जी के आवास पर सम्पन्न हुई।जिसके मुख्य अतिथि वरिष्ठ गीतकार सुभाष यादव जी रहे और अध्यक्षता वरिष्ठ गीतकार वीरेंद्र मिश्र बिरही ने किया। संचालन डा.सत्य नारायण 'पथिक' ने किया।

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ भाई बृजेश राय जी द्वारा सुमधुर स्वर में मां सरस्वती की वंदना प्रस्तुत की गई।

तत्पश्चात गज़लकार निरंकार शुक्ल "साकार" ने अपने इस मक्ते के शेर से सभी को सोचने के लिए मजबूर कर दिया -

कभी 'साकार' से मत पूछना जलवा गरीबी का ,गरीबी अर्थी से फूलों का माला छीन लेती है।

गीतों के राजकुमार कहे जाने वाले भाई प्रेमनाथ मिश्र ने वैदिक ऋचाओं की बात इन पंक्तियों में की -

कोशिश करना राह दिखायें,बनकर वेद ऋचाएं,

उद्वेलन से निकल रही जो,अनगिनत अग्नि शिखाएं।

मुख्य अतिथि वरिष्ठ गीतकार सुभाष यादव जी ने नवरात्र के इस पावन अवसर पर बेटियों की बात की -

सृष्टि का सुंदरतम उपहार, बनाया है जिसको करतार।

किया है दुनिया ने स्वीकार, बेटियों से है यह सारा संसार।।

अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ गीतकार वीरेंद्र मिश्र बिरही ने सभी को आशीर्वाद देते हुए भारत की धरती को इन शब्दों में नमन किया -

वंदन अभिनंदन की धरती यह नंदन वन सा पावन है।

आने को देव तरसते हैं, स्वर्ग से भी मनभावन है।।

अन्य जिन कवियों ने काव्य पाठ किया उनके नाम है सर्वश्री विनय मितवा, धर्मेंद्र त्रिपाठी, कुमार अभिनीत,राम सुधार सिंह सैथवार, सुधाकर साहनी, बृजेश राय,डा.सत्य नारायण 'पथिक', अवधेश शर्मा 'नंद', अरविंद 'अकेला' आदि।

अंत में सभी के प्रति आभार व्यक्त किया संस्था महासचिव भाई बृजेश कुमार राय ने।

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