श्वेते बृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचि:।
महागौरी शुभं दधान्महादेवप्रमोददा।।
महागौरी का आठवां नवरात्र में पूजन होता है। इस रूप में माँ का वाहन वृषभ है, जिसका भाव धर्म होता है। माँ इस रूप में हमें समझती है कि हमारे जीवन में धर्म की परम आवश्यकता है। धर्म 'धृ' धातु से उद्भुत हैं, जिसका अर्थ है धारण करना। उस परम सत्ता को, जो हमारे अंतःकरण में विराजमान है। इसी धर्म को धारण करने से जीवन में प्रखरता व उज्जवलता का साम्राज्य स्थापित होता है और यही महागौरी का संदेश है।
ॐ श्री आशुतोषाय नम:
श्री सियाबिहारी
