सर्व श्री आशुतोष महाराज जी का चिंतन(अनमोल वचन) प्रस्तुतिकरण श्री आर सी सिंह जी।
ठीक है कि सभी एक हों!लेकिन क्या इससे पूर्ण शान्ति एवं व्यवस्था परिवर्तन हो जाएगा? क्या दुनिया में भाईचारा आ जाएगा? क्या भ्रष्टाचार समाप्त हो जाएगा? क्या लोग जीव हत्या एवं माँस मदिरा बंद कर देंगे? नहीं न!यह सब फिर भी बंद नहीं होगा।
आप बताइए, जब प्रभु राम आए थे तो उस समय तो सभी हिन्दू थे। जब भगवान कृष्ण आए तो उस समय भी सभी हिन्दू थे।शिव के अनेक रूपों से लेकर मां दुर्गा ने अनेक बार लोगों की रक्षा की। तब तो कोई मुसलमान, ईसाई, सिख, जैनी, बुद्धिस्ट, पारसी नहीं थे। तब तो सब जगह केवल हिन्दू ही थे।भला फिर क्यों भगवान को आना पड़ा धरती पर? क्यों लोगों को धर्म के रास्ते पर चलाना पड़ा?कंस, महिसासुर, रावण, दुर्योधन, भस्मासुर, ताड़कासुर आदि सभी राक्षस हिन्दू ही थे।
तब भगवान क्यों आए थे? क्योंकि यह काम सिर्फ वही कर सकते हैं। शान्ति, प्रेम,भाईचारे की स्थापना के लिए भगवान को धरती पर अवतार/महापुरुष रूप धर कर आना पड़ता है।
इसलिए आज भी पतन की खाई में गिर चुके मनुष्य को उबरने हेतु मनुष्य को एक महापुरुष की शरणागत होना ही पड़ेगा।ताकि फिर से दुनिया में धर्म, न्याय, शान्ति, प्रेम स्थापित हो सके।
इसलिए चाहे कोई हिन्दू हो या सिख, जैनी हो या बुद्धिस्ट, सबको वर्तमान समय में मौजूद ऐसे महापुरुष को ढूँढ़ना होगा जो उन्हें उनके आंतरिक जगत में सत्य का दर्शन करवा दे। दीक्षा ही मुक्ति का, निर्वाण का सनातन मार्ग है।
वर्तमान में यह "ब्रह्मज्ञान" गुरुदेव श्रीआशुतोष महाराज जी द्वारा मानव समाज को प्रदान किया जा रहा है। ऐसे महापुरुष केवल हिन्दू को ही नहीं जगाते हैं, बल्कि उनका यही कहना है- "सभी मानव जागो! और मानव तन के परम लक्ष्य परमात्मा को पहचानो।"
**ओम् श्रीआशुतोषाय नमः**
"श्री रमेश जी"
