सूती कपड़े कपास से बनते हैं। कपास से
रुई निकलती है और उस रुई से बने कपड़े हमारे शरीर की सुरक्षा और प्रतिष्ठा
करते हैं। कपास को रुई से वस्त्रबनने तक अनेक प्रकार के कष्टों को सहना पड़ताहोगाऔर अब उससे हमें वस्त्र के रुप में सुरक्षा और प्रतिष्ठा मिलती है।वह कपास नीरस,गंधहीन होता है लेकिन वस्त्रके रुप में उसका गुण अपार, प्रशंसा के लायक और सर्वग्राहृय है। इसीतरह साधु-समाज भी है जो सदा और सर्वत्र आनंद,शांति और कल्याण विखेरता है,
कभी किसी का अहित सोचता भी नहीं।
साधु-समाज तो संसार में चलता-फिरता
अघहारी तीर्थराज प्रयाग है, जहां श्रीराम भक्ति पापघ्नाश्रीगंगाप्रवाहतुल्यहै।–
साधु चरित सुभचरितकपासू।
निरसबिसदगुनमय फलजासू।।
जोसहिदुखपरछिद्रदुरावा।
वंदनीयजेहिजगजसपावा।।
मुदमंगलमयसंतसमाजू।
जोजगजंगमतीरथराजू।।
रामभक्तिजहसुरसरिधारा।
सरस इब्रह्म बिचारप्रचारा।।–बालकांड,
रामचरितमानस।
प्रस्तुतकर्ता
डां०हनुमानप्रसाद चौबे
गोरखपुर।
