गोष्ठी में पधारे सम्मानित साहित्यकार जन
भागीरथी सांस्कृतिक मंच, गोरखपुर की 800 वी काव्य गोष्ठी डा .अमिताभ शर्मा के 10 नंबर बोरिंग , गोरखनाथ रोड स्थित आवास पर संपन्न हुई।
गोष्ठी की अध्यक्षता संस्था के पूर्व उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ कवि श्री चंद्रगुप्त प्रसाद वर्मा "अकिंचन" जी ने किया हुआ कार्यक्रम का संचालन संस्था सचिव एवं वरिष्ठ कवि कुन्दन वर्मा "पूरब" जी ने किया।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ वरिष्ठ कवि सुधीर श्रीवास्तव "नीरज" जी के द्वारा प्रस्तुत वाणी वंदना से हुआ।
तत्पश्चात युवा ग़ज़लकार ज्ञानेश 'नापित' ने आज की घुसखोरी पर दृष्टिपात करते हुए यह शेर पढ़ा -
ना ना घूस नहीं है रिवायत है "नापित" ,
कुछ रखकर ही फ़ाइल देना होता है।
आज की व्यवस्था पर तंज करते हुए वरिष्ठ कवि जयप्रकाश मल्ल ने गीत पढ़ा -
वतन के मसले छुपे हुए हैं, वक्तव्य और नारों से।
मिथ्या खबरें निकल रही है, टी वी से, अखबारों से।।
आजकल की परिस्थितियों में जिस तरह से वैवाहिक संबंधों में विच्छेद हो रहे हैं उस पर अपनी नजर डाली- डॉ.फूलचंद प्रसाद गुप्त ने-
न जाने किसने प्रेम को नजर लगा दिया।
उसने अपने पी को दिल से भगा दिया।।
कवि अरविन्द शर्मा जी ने अपने पिता को अपनी स्मृतियों में याद करते हुए मार्मिक कविता पढ़ी -
मैं अपने पिता की लिखावट हूं -
उनके हाथ के अक्षरों में ,
उनके शब्दों के मोड़ों में ,
कहीं ना कहीं मेरा आकार बसा है।
अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि चंद्रगुप्त प्रसाद वर्मा 'अकिंचन' ने देश और समाज की पीड़ा से अवगत कराते हुए कहा -
पीड़ाओं से आकुल तन है।
वेदनामय व्याकुल मन है।।
अन्य जिन कवियों ने काव्य पाठ किये उनके नाम है - सर्वश्री अरविंद 'अकेला', दानिका प्रसाद विश्वकर्मा, निरंकार शुक्ल 'साकार', राम सुधार सिंह सैथवार , सुधीर श्रीवास्तव 'नीरज' , सुधाकर साहनी, कुन्दन वर्मा 'पूरब' , आचार्य ओमप्रकाश पांडेय , डा .सत्यनारायण 'पथिक' अरुण ब्रह्मचारी, महमूद भाई, डा .बहार गोरखपुरी, कौसर गोरखपुरी आदि।
श्रोताओं में संस्था उपप्रबंधक भाई संजय प्रकाश सिंह, डा.अमिताभ शर्मा एवं उनके परिवार जन उपस्थित रहे।
अंत में सभी के प्रति आभार व्यक्त किया डा.सत्य नारायण 'पथिक' ने।
