**इस नश्वर शरीर से प्रेम करने की बजाय हमें ईश्वर से प्रेम करना चाहिए।**

 सर्व श्री आशुतोष महाराज जी का चिंतन(अनमोल वचन) प्रस्तुतिकरण श्री आर सी सिंह जी।


सभी सत्य बोलने से डरते हैं। उन्हें लगता है कि सत्य का साथ देने से उनके अधिकारी नाराज हो जाएंगे। उच्च पदों पर आसीन मालिक उन्हें यातनाएं देंगे। पर कुछ भी हो जाए, हमें झूठ का दामन नहीं थामना चाहिए। सत्य पथ से विचलित नहीं होना चाहिये। किसी के कुपित होने के डर से हमें सत्य की मशाल नहीं छोड़नी चाहिए।चाहे कुछ भी हो जाए हमें सच पर ही कायम रहना चाहिए।

    उपनिषदों में कहा गया है... इस पंचभूत देह को चलायमान रखने वाली सत्ता- आत्मा है। वही वास्तविक सत्य है। इस देह को तो नष्ट किया जा सकता है। किंतु परमात्मा का अंश- आत्मा को नहीं! यह सत्ता अजर अमर व अविनाशी है। इसे न तो अग्नि भस्म कर सकती है, न जल गीला कर सकता है,    न वायु सुखा सकती है और न ही कोई अस्त्र-शस्त्र खंडित कर सकता है। इसलिए पांच तत्वों से निर्मित देह की रक्षा हेतु हमें सनातन धर्म को नहीं छोड़ना चाहिए।

    अतः इस नश्वर शरीर से प्रेम करने की बजाय हमें ईश्वर से प्रेम करना चाहिए।सत्य और धर्म से प्रेम करना चाहिए, क्योंकि ये ही अनश्वर है।

**ओम् श्रीआशुतोषाय नमः**

"श्री रमेश जी"

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