सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा वर्षा
यह धारणा संसार में आमतौर पर पाई जाती है कि भगवान को देखा नहीं जा सकता। ईश्वर हवा के भांति है। उसे केवल मना या महसूस किया जा सकता है। जबकि सत्य इससे बिलकुल विपरीत है। हमारे ग्रंथ स्पष्ट उदघोष करते हैं कि ईश्वर केवल मानने का नहीं, देखने का विषय है। समय के पूर्ण गुरु जब ब्रह्मज्ञान ज्ञान की दीक्षा प्रदान करते हैं, तब वह दिव्य दृष्टि खोलकर तत्क्षण अंतर्गत में ईश्वर का दर्शन करवाते हैं। हमारे ग्रंथो में इसका बार-बार उल्लेख मिलता है । जैस - मीराबाई ("गुरु रविदास जी के शरण में") , स्वामी विवेकानंद जी (" गुरु रामकृष्ण परमहंस के शरण में") जाकर ईश्वर का प्रत्यक्ष दर्शन किया ,अनेकों उदाहरण है।
श्री गुरु अर्जन देव जी कहते हैं कि गुरु ने वह नेत्र प्रदान किया , जिसके द्वारा घट में ही विराजमान उस प्रभु के मोहक रूप को देखकर मैंने कण- कण में उसे पहचान लिया। जब भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को दिव्य चक्षु दिये तो अर्जुन ने भी अपने घट के अंदर ईश्वर का दर्शन कर निहाल हो गया।
अतः पाठकों विवेकी बनो! तथाकथित गुरु के चंगुल से बाहर आकर, सत्य का मार्ग अनुसरण करो। समय के पूर्ण गुरु द्वारा ब्रह्मज्ञान में दीक्षित होकर, ईश्वर का दर्शन करो। जीवन सफल व सार्थक बनाओ।
ॐ श्री आशुतोषाय नम:
श्री सियाबिहारी✍️
