कथा के तृतीय दिवस में दीप प्रज्वलित कर कथा का आरंभ करती हुई पूर्व मेयर डॉ सत्या पांडे जी,साथ में श्री गोपाल प्रसाद जी एवं स्वामी स्वामी जन। कथा में पधारे अन्य अतिथि गण
दिव्य ज्योति जागृती संस्थान के तत्वाधान में दिनांक 9 दिसंबर से 13 दिसंबर तक, साम 4:00 बजे से रात्रि 8:00 बजे तक, दिव्य ज्योति पार्क, तारामंडल रोड, सिद्धार्थ एंक्लेव, जिला गोरखपुर में पांच दिवसीय श्री हरि कथा का भव्य आयोजन आयोजित किया गया है। कार्यक्रम के तृतीय दिवस में दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की साध्वी शिष्या साध्वी सुश्री सुषमा भारती जी ने भक्तों के बीच में सुंदर विचारों को प्रस्तुत किया। साध्वी जी ने कहा
आज के समय में, जब तनाव और भय से मानवता ग्रस्त व त्रस्त है, ऐसे में इन सत्संग कार्यक्रमों से मिलने वाली प्रेरणाएं एक शक्तिशाली आधार बनकर व्यक्ति को उसकी अंतरात्मा से पुनः जोड़ती हैं। परिणामस्वरूप, व्यक्ति अधिक अर्थपूर्ण, शांतिपूर्ण और आनंदमय जीवन जी पाता है।
भावपूर्ण भक्ति संगीत ने एक शांतिपूर्ण व दिव्य वातावरण निर्मित किया, जिससे सत्संग के बीज बोने के लिए उपयुक्त आधार तैयार हुआ, जिसमें जीवन रूपांतरित करने की क्षमता है। साध्वी जी ने विभिन्न उदाहरणों व दृष्टांतों से यह स्पष्ट किया कि जीवन की यात्रा में एक पूर्ण आध्यात्मिक गुरु प्रकाश-स्तंभ के समान हैं, जो मानव की अंतर यात्रा का मार्ग प्रकाशित व प्रशस्त करते हैं। अन्यथा अक्सर आधुनिक जीवन के शोर, भ्रम और विचलनों से यह मार्ग ढका छिपा ही रहता है। आज के इस आपाधापी भरे जीवन में, जहाँ लोग भावनात्मक अस्थिरता और सूचना के अतिरेक से जूझ रहे हैं, एक पूर्ण गुरु का जीवन में सान्निध्य और भी अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाता है। पूर्ण गुरु केवल शाश्वत ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि शिष्य को जीवन की गहराईयों से भी परिचित कराते हैं, जिसके बाद वह भय, संदेह और आंतरिक अव्यवस्था से ऊपर उठ पाता है।
सत्संग में आगे कहा गया कि शिष्य का अपने गुरु के प्रति वास्तविक कर्तव्य आंतरिक समर्पण, अटूट श्रद्धा और सच्ची आज्ञाकारिता में निहित होता है। सच्चा शिष्य गुरु के उपदेशों के अनुरूप अपने विचार, वाणी और कर्मों को ढालकर ही अपनी निष्ठा का परिचय देता है। अंततः, गुरु के निर्देशों का पालन करने से लाभ शिष्य को ही मिलता है। कारण कि अनुशासन, ध्यान और आत्मावलोकन का हर कदम मन को तराशता है, हृदय को शुद्ध करता है और आत्मा के परमात्मा से संबंध को मज़बूत बनाता है। कार्यक्रम के अंतर्गत स्वामी अर्जुनानंद जी ने अपना विचार प्रकट करते हुए कहा गुरु केवल ईश्वर की बात ही नहीं करता है शास्त्र अनुसार मानव के अंतर्गत में दिव्य नेत्र प्रदान कर उस परमात्मा के ज्योत स्वरूप का दर्शन भी करता है।तभी साधक की भक्ति प्रारंभ होती है। श्री गुरुदेव आशुतोष महाराज जी एक ऐसे गुरु हैं जिनके माध्यम से जिनकी कृपा से ब्रह्म ज्ञान प्रदान कर शास्त्र सम्मत ईश्वर का दर्शन भी कराया जाता है।कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्र उच्चारण भजन संकीर्तन से हुआ एवं कार्यक्रम का समापन मंगल आरती के माध्यम से किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉक्टर सत्य पांडे जी पूर्व मेयर गोरखपुर, डॉक्टर गोपाल प्रसाद जी गोरखपुर विश्वविद्यालय, आर के शाही,अनिल शर्मा जी, अनिल श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे।

