भगवान शिव की महिमा ऐसी है जो देश-काल की समस्त सीमाओं से पूरे विश्व के कण-कण में समाहित है।

 

            कथा में पधारे अतिथि गण का सम्मान

                  कथा शुभारंभ दीप प्रज्वलन कर के, 
                    शुरूवात करते हुए मुख्य अतिथि।

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के तत्वाधान में दिनांक 9 दिसंबर से 13 दिसंबर तक, शाम 4:00 बजे से 8:00 बजे तक, दिव्य ज्योति पार्क, तारामंडल रोड, सिद्धार्थ एंक्लेव, जिला गोरखपुर में पांच दिवसीय श्री हरि कथा का भव्य आयोजन आयोजित किया गया है। दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की साध्वी शिस्या सुषमा भारती जी ने कथा के चतुर्थ दिवस में भक्तों को संबोधित करते हुए भगवान शिव के विषय में व्याख्यान दिया। 

भगवान शिव की महिमा ऐसी है जो देश-काल की समस्त सीमाओं से पूरे विश्व के कण-कण में समाहित है। आज केवल भारत ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण विश्व में भगवान शिव की उपासना के असंख्य प्रमाण मिलते हैं। उदाहरणस्वरूप तुर्किस्तान के बेबीलोन में 1200 फुट का विशाल शिवलिंग, स्कॉटलैंड में स्वर्णजड़ित शिवलिंग, आयरलैंड के तारा हिल में प्राचीन शिवलिंग, तथा दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, मेक्सिको, जावा, कम्बोडिया, सुमात्रा, नेपाल, भूटान, इटली एवं यूरोप के विभिन्न क्षेत्रों में प्राचीन शिवलिंगों के प्रमाण उपलब्ध हैं। ये सभी साक्ष्य भगवान शिव की सर्वगम्यता एवं वैश्विक प्रसिद्धि को दर्शाते हैं। भारत में अनेक विदेशी आक्रमणों एवं सामाजिक परिवर्तनों के बाद भी यदि भारतीय संस्कृति आज भी जीवंत है, तो इसका कारण इसकी धमनियों में प्रवाहित होता शिव तत्व है। परंतु आधुनिकता की अंधी दौड़ में आज की पीढ़ी शिव तत्व से दूर होती जा रही है, जिसके परिणामस्वरूप समाज में हिंसा, वैमनस्य और मतभेद बढ़ रहे हैं। प्रभु की यह पावन कथा इसी सनातन शिव तत्व को जागृत करने हेतु है, क्योंकि ब्रह्मज्ञान के माध्यम से शिव तत्व भीतर प्रकट होता है। जब मनुष्य “सत्यं शिवं सुन्दरम्” के पथ का अनुसरण करता है, तभी उसका जीवन कल्याणकारी स्वरूप को प्राप्त करता है। भगवान शिव को यदि प्राप्त करना है मानव समाज को एक पूर्ण सद्गुरु की आवश्यकता है। पूर्ण सतगुरु ही भगवान शिव के मस्तक पर विराजित तृतीय नेत्र का रहस्य प्रकट कर सकते हैं।भगवान शिव का तीसरा नेत्र मानव समाज को यह संदेश दे रहा है ईश्वर को देखने के लिए चरम चक्षों की नहीं दिव्य चक्षु की आवश्यकता है। जब ब्रह्म ज्ञान के माध्यम से दिव्य चक्षु प्रकट होता है मानव शिव के तत्व स्वरूप, प्रकाश स्वरूप का दर्शन कर पाता है। दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज की दिव्य चक्षु के माध्यम से शिव नेत्र के माध्यम से उस परमात्मा के शिव तत्व रूप का प्रकाश रूप का दर्शन करवाते हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्र उच्चारण भजन संकीर्तन से हुआ एवं समापन मंगल आरती के माध्यम द्वारा किया गया।कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती चारु चौधरी उपाध्यक्ष महिला आयोग

               

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