*गागर में सागर*

        सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा वर्षा



1 - मोक्ष प्राप्ति के लिए ज्ञान ही एक अनुष्ठान है दूसरा कोई नहीं। 

2-अग्नि में  घी की आहुति देने का अपेक्षा अपने  अहं की आहुति दो। 

3- मुझे इसकी चिंता नहीं कि मेरे पास कोई अधिकार नहीं, पर मुझे यह अवश्य देखना है कि मैं किसी अधिकार के योग्य हूं या नहीं। 

4- जीवन में भगवान को अभिव्यक्त करना ही  मनुष्य का मनुष्यतव है। 

5- मानव का दानव होना उनकी हार  है। मानव का महामानव होना उसका चमत्कार है। 

6- मुसीबत में धीरज, अभ्युदय में क्षमा, सभा में कौशल पूर्ण वाणी, युद्ध में विक्रम और श्रुति में व्यसन- यह महात्माओं का स्वभावत: सिद्ध होते हैं। 

7  - त्याग यह नही है कि भगवा वस्त्र धारण कर लिया जाए या  फिर वस्त्रहीन घूमा जाए  और सूखी रोटी खाई जाए। त्याग तो वह है की अपनी आरजू ,इच्छा और ख्वाहिश को जीता जाए। 

8- पाप सभी बीमारियों से बुरा है, क्योंकि वह आत्मा को पीड़ा देता है। 

9- अहंकार जितना बढ़ता है, व्यक्ति उतना छोटा होता जाता है। 

10- भोजन तथा वस्त्र के दान से विधा का दान श्रेष्ठ है तथा इससे भी श्रेष्ठ है - आध्यात्मिक ज्ञान का दान। 

                 ॐ श्री आशुतोषाय नम:

                        सिया बिहारी✍️

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