देखों आ गये नैनों में नीर, पीर कोई छलक-छलक आए!!

           साहित्यकार श्री सुधाकर साहनी जी को 
                           पुरस्कृत करते हुए

भागीरथी सांस्कृतिक मंच,गोरखपुर 803वी काव्य गोष्ठी संस्था महासचिव बृजेश राय जी के  राप्ती नगर स्थित आवास पर सम्पन्न हुई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ गीतकार श्री अवधेश शर्मा "नन्द" जी ने किया। मां सरस्वती की वंदना वरिष्ठ गीतकार श्री राम सुधार सिंह सैथवार जी ने प्रस्तुत किया।

तत्पश्चात युवा कवि सुधाकर साहनी ने अपने प्रिय की याद इन शब्दों में व्यक्त की -

जिंदगी की याद में कब तलक ख़फ़ा रहोगे,

तुम्हारी याद का सावन हमें अब भी बुलाता है।

वरिष्ठ कवि डा.विजय प्रताप शाही ने गुजरे हुए जमाने के चिट्ठियों की बात की -

मिली मुस्कुराती हुई चार पाती।

वो रिश्ते निभाती हुई चार पाती।।

अपने गांव के बीते हुए दिनों की याद दिलाई वरिष्ठ कवि भाई बृजेश राय ने -

देखों आ गये नैनों में नीर,

पीर कोई छलक-छलक आए!!

अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि अवधेश शर्मा 'नन्द' ने सत्य और झूठ की बात इन शब्दों में की -

उपहल कू-कू बाग से,कांव बनल चढ़बांक ।

सांच सहत अन्याय जब,झूठ जमावत धाक।।

इस अवसर पर युवा कवि सुधाकर साहनी को "भागीरथी साहित्य प्रागल्भय पुरस्कार" से सम्मानित किया गया।

अन्य जिन कवियों ने काव्य पाठ किया उनके नाम है - श्रीमती वंदना मिश्रा, श्रीमती सुमन झा 'माहे' एवं सर्वश्री राम सुधार सिंह 'सैथवार', अरविंद 'अकेला', कुन्दन वर्मा 'पूरब', निरंकार शुक्ल 'साकार', विनय मितवा,राम समुझ 'सांवरा', डा.सत्य नारायण 'पथिक',डा. सुधीर श्रीवास्तव 'नीरज',बद्री विश्वकर्मा 'सांवरिया' , उमेश चन्द्र श्रीवास्तव, कुमार अभिनीत,भीम प्रसाद प्रजापति आदि।

श्रोताओं में श्री अनिल कुमार श्रीवास्तव,राम आधार झा आदि उपस्थित रहे।

सभी के प्रति आभार व्यक्त किया संस्था महासचिव बृजेश राय जी ने।

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