सोचता हूं ।

 

एक ही तालाब में अनेक प्रकार के जीव

उत्पन्न होते हैं और रहते हैं,जैसे कमल

और जोंक।कमल देखने में अच्छा लगता है, सुगंध भी देता है, मनमोहक होता है और मन प्रफुल्लित कर देता है। वहीं जोंक है जो देखने में अच्छा नहीं लगता,

यदि जाने/अनजाने किसी का शरीर छूलियातो उस शरीर में चिपक कर इंजेक्शन के समान खून चूसने लगता है,

छुड़ाने परभी आसानी से नहीं छोड़ता।

इसी तरह एक ही संसार में विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु उत्पन्न होते हैं और विविध

प्रकार के क्रियाकलापों को करते हुए 

रहते हैं, उदाहरणस्वरूप संत/साधु/

सज्जन और असंत/असाधु/दुर्जन ‌। संसार में ये दोनों एक साथ पैदा होते हैं,लेकिन

सज्जन मृत्यु रुपी संसारसे उबारनेवाले 

सुधा/अमृत के समान होते हैं, वेउदारऔर 

सर्वहितकारी होते हैं औरदुर्जन

बारुणी/मदिरा/शराब (मोह,लोभ,

क्रोध,मद, जड़ता,प्रमाद आदि उत्पन्न करने वाले )केसमान होते हैंजैसाकि

परमसंतमहात्मा तुलसी दास जी ने लिखा है –

उपजहिंएकसंगजगमाहीं।

जलज जोंकजिमि गुनबिलगाहीं।।

सुधा सुरा समसाधु असाधू।

जनक एकजगजलधि अगाधू।।–

बालकांड, रामचरितमानस 

               प्रस्तुतकर्ता 

        डां०हनुमानप्रसादचौबे

                गोरखपुर।

Post a Comment

Previous Post Next Post