सर्व श्री आशुतोष महाराज जी का चिंतन(अनमोल वचन) प्रस्तुतिकरण श्री आर सी सिंह जी।
कभी कभी बच्चों की कविताएं हमें सुखद जीवन जीने के मंत्र सिखा देते हैं।सत्य तो यही है कि जीवन का हर पड़ाव हमें आध्यात्मिक इशारे देकर कुछ सिखलाने का प्रयास करता है। तो आइए ऐसे ही कुछ कविता के सार समझते हैं--
कविता 1. सूरज निकला मिटा अंधेरा,
देखो बच्चों हुआ सवेरा।
आया मीठी हवा का फेरा,
चिड़ियों ने फिर छोड़ा बसेरा।
जागो बच्चों अब मत सो,
इतना सुंदर समय मत खो।
सार-- इस कविता में बच्चा शब्द हर उस इंसान को संबोधित करता है, जो थका हारा निराश है। ऐसे लोगों को यह कविता बताती है कि हर दिन जब सूरज निकलता है, तो अपने साथ एक नया सुअवसर लाता है। यह सुअवसर मीठी हवाओं के फेरे की तरह होता है जो हमारे अंदर एक नई ऊर्जा का सृजन करता है। परिंदे अपने चहचहाते स्वरों में आलस्य, हताशा और नकारात्मकता को त्याग कर इस नए अवसर का लाभ उठाने की प्रेरणा देते हैं। ताजगी भरे नव निर्माण के क्षण बार बार जीवन में आते हैं। उन मौकों को संभालो। सोते न रहो, जागो।
कविता 2.
बंदर मामा पहन पजामा दावत खाने आए
ढीला कुर्ता टोपी जूता पहन बहुत इतराए
रसगुल्ले पर जी ललचाया मुंह में रखा गप से
नरम नरम था गरम गरम था जीभ जल गई लप से
बंदर मामा रोते रोते वापिस घर को आए
फेंकी टोपी फेंका जूता रोए और पछताए
सार-- इस कविता में बंदर एक चंचल मन वाले भटके हुए साधक को दर्शा रहा है।इंसान का मन बहुत तेज रफ्तार से भागता है। कभी एक वस्तु के पीछे, तो कभी दूसरी वस्तु के पीछे। तृष्णा की आयु बेअंत होती है।ऐसे बंदर मन वाला मनुष्य संसार के विषयों को ललचाई नजरों से देखता है। पर परिणाम? कई बार रसीले और लुभावने दिखने वाले रसगुल्ले (विषय) अपने भीतर ताप लिए होते हैं। ग्रहण करने वाले की जीभ जला देते हैं यानी तृष्णा की आग तृष्णावंत को ही झुलसा देती है।इसलिए सादा जीवन जीएँ।यह सरल सी कविता हमें तत्व ज्ञान सिखाती है।
कविता 3.
Are you sleeping, Are you sleeping
Brother John, Brother John?
Morning bells are ringing,
Morning bells are ringing
Ding ding dong, ding ding dong!
सार--सोने का अर्थ सिर्फ विश्राम करना और मीठे मीठे सपनों को संजोना ही नहीं होता।सोने का अर्थ यह भी है कि आप अपने आसपास होने वाली हलचल से अंजान हैं।कविता में मार्निंग बेल्स दर्शाते हैं, कुदरत द्वारा दिए जा रहे विपदाओं के अनेकों संकेत।ये संकेत संपूर्ण मानवता को जागरूक करने का एक आखिरी प्रयास है, जो कुदरत कर रही है।
इसी तरह साधकों के लिए ये मार्निंग बेल्स हैं, सदगुरु के सतसंग व पवित्र विचार जो निरंतर हमें इस स्वर्णिम बेला की अहमियत से अवगत करवा रहे हैं।यही समय है जब हर शिष्य को अपनी सच्ची साधना का प्रमाण देना है और आने वाले नवयुग का हिस्सा बनकर विश्व में शांति का बिगुल बजाना है।
**ओम् श्री आशुतोषाय नमः**
"श्री रमेश जी"
