सर्व श्री आशुतोष महाराज जी का चिंतन(अनमोल वचन) प्रस्तुतिकरण श्री आर सी सिंह जी।
HOPE need not mean EXPECTANCY -- जरूरी नहीं कि 'आशा' से अभिप्राय 'अपेक्षा' ही हो।सकारात्मक वृत्ति के साथ आशा भरी नजरों से संसार को देखें। तब जगत के दुखों और अवसाद रूपी अंधकार में भी शांति, सुख प्रसन्नता का दीपक जगमगाएगा। अपने दृष्टिकोण को सदा सकारात्मक रखें। इसी पर सब निर्भर करता है।
महात्मा बुद्ध भी कहा करते थे-- 'तुम मुझे अपने विचार, अपनी सोच बताओ। तब मैं तुम्हें बता दूँगा कि तुम क्या हो!'
नि:संदेह, जहाँ व्यक्ति की नकारात्मक विचारधारा निराशा, अवसाद व दुख का मूल है। वहीं उसका सकारात्मक दृष्टिकोण आशा, प्रसन्नता व सुख का प्रतीक है। सारतः जीवन के हर पड़ाव, हर परिस्थिति में हमें अपना नजरिया और रवैया आशावादी रखना चाहिए। तभी हमारा जीवन स्वयं 'आशा' का प्रतीक बनकर सभी के लिए 'आशा' की किरण बन पाएगा।
**ओम् श्री आशुतोषाय नमः**
"श्री रमेश जी"
